: मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री 729 अरब रुपये का हुआ : बीते बरस (वर्ष 2011) देश के मीडिया व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ग्रोथ रेट 12 परसेंट रही और यह 729 अरब रुपये का हो गया है. यह आंकड़ा फेडरेशन आफ चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और केपीएमजी का संयुक्त रूप से है. रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले वर्षों में इस उद्योग का विकास 15 फीसदी चक्रवृद्धि दर से होगा और 2015 तक यह उद्योग 1457 अरब रुपये का हो जाएगा.
रिपोर्ट में कहा गया कि स्मार्ट फोन, टैबलेट, पीसी और अन्य उपकरणों का टीवी, फिल्म, समाचार, रेडियो, संगीत सभी कारोबारों पर व्यापक असर पड़ रहा है. इसके कारण कुल विज्ञापन का चार फीसदी खर्च इंटरनेट माध्यम पर होने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी श्रेणी के शहरों में तेज विकास, क्षेत्रीय मीडिया के विकास व नए मीडिया कारोबार के तेजी से हो रहे प्रसार के कारण मीडिया और मनोरंजन उद्योग में यह विकास दर्ज किया गया. यह रिपोर्ट फिक्की के मनोरंजन और उद्योग सम्मेलन (फिक्की फ्रेम्स 2012) में औपचारिक रूप से जारी की जाएगी. सम्मेलन मुंबई में बुधवार से शुरू होगा. रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंट माध्यम उद्योग 8.4 फीसदी विकास के साथ 209 अरब रुपये का हो गया, जो उम्मीद से कम रहा, क्योंकि इस उद्योग को विज्ञापन खर्च में कटौती का सामना करना पड़ा.
टेलीविजन उद्योग के 2011 में 329 अरब रुपये का होने का अनुमान है. वर्ष 2016 तक इस उद्योग के 17 फीसदी सलाना चक्रवृद्धि विकास दर के साथ 735 अरब रुपये का हो जाने का अनुमान है. इंटरनेट के बढ़ते उपयोग और नए उपकरणों के प्रसार के कारण नए मीडिया कारोबार में तेजी से विकास हो रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि स्मार्ट फोन, टैबलेट, पीसी और अन्य उपकरणों का टीवी, फिल्म, समाचार, रेडियो, संगीत सभी कारोबारों पर व्यापक असर पड़ रहा है. इसके कारण कुल विज्ञापन का चार फीसदी खर्च इंटरनेट माध्यम पर होने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक एनीमेशन, वीएफएक्स और पोस्ट प्रोडक्शन उद्योग में 2010 के बाद 31 फसदी की दर से विकास हुआ और यह उद्योग 2011 में 31 अरब रुपये का हो गया. रेडियो उद्योग का विकास 15 फीसदी की दर से हुआ और यह 11.5 अरब रुपये का हो गया.





