नई दिल्ली : उत्तराखंड में सीएम की कुर्सी को लेकर घमासान जारी है. विजय बहुगुणा के ताजपोशी से नाराज उत्तराखंड कोटे से केंद्रीय मंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेज दिया है. पीटीआई के मुताबिक उत्तराखंड का मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज हरीश रावत ने इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि हरीश रावत ने अपने इस्तीफे में कहा है कि उनके समर्थकों के हंगामा को देखते हुए उनको मंत्री पद से मुक्त किया जाए.
रावत ने कहा है कि इन हालातों में काम करना मुश्किल है. फिलहाल प्रधानमंत्री ने अभी रावत के इस्तीफे पर अभी कोई फैसला नहीं लिया है. हरीश रावत ने भले ही अपने समर्थकों के हंगामा को कारण बताते हुए इस्तीफा सौंपा हो, पर बताया जा रहा है कि विजय बहुगुणा को सीएम बनाए जाने से वो नाराज हैं. हरीश रावत ने सोनिया गांधी को भी पत्र लिखा है कि जिसमें उन्होंने कहा है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए.
बताया जा रहा है कि नाराज रावत संसदीय कार्यमंत्री होने के बाद भी संसद नहीं पहुंचे हैं. वे अब तक अपने घर में ही हैं और संसदीय कमेटी की अहम बैठक में भी शामिल नहीं हुए. दूसरी तरफ उनके समर्थकों का हंगामा लगातार जारी है. आज सुबह भी उनके घर के सामने समर्थकों ने जबर्दस्त हंगामा किया और नारेबाजी की. इस बीच केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने हरीश रावत के इस्तीफे की बात को बेबुनियाद बताया है.
बताया जा रहा है कि लम्बे इंतजार तथा बहुमत जुटाने के बाद कांग्रेस ने उत्तराखंड के सीएम के नाम का ऐलान से कर दिया लेकिन इसके साथ ही इस पहाड़ी राज्य में घमासान मच गया है. सीएम की रेस से बाहर हो गए हरीश रावत के समर्थकों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है. रावत के इस्तीफे की खबरों के बीच बीती रात विजय बहुगुणा और उनकी बहन रीता बहुगुणा जोशी उनके घर पहुंचे तथा उन्हें मनाने की कोशिश की. उल्लेखनीय है कि कई दौर की बैठक के बाद खुद सोनिया गांधी ने उत्तराखंड से सांसद विजय बहुगुणा के नाम पर मुहर लगाई है.
इधर, विजय बहुगुणा ने कहा है कि पार्टी आलाकमान ने जो भी तय किया है उसका सबको सम्मान करना चाहिए. 65 साल के विजय बहुगुणा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा के बेटे और राज्य की कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा के भाई हैं. इलाहाबाद और बांबे हाईकोर्ट में जज रह चुके विजय बहुगुणा के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होंगे क्योंकि उन्हें न सिर्फ विकास और भ्रष्टाचार के मोर्चे पर राज्य को आगे ले जाना होगा बल्कि पार्टी में गुटबाजी को भी खत्म करना होगा.
दूसरी तरफ हरीश रावत समर्थकों का कहना है कि मंगलवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में हरीश के नजदीकी विधायक शामिल नहीं होंगे. सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड से जीते कांग्रेसी विधायकों में आधे से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं. कहा जा रहा है कि सोलह विधायक हरीश रावत को सीएम बनता देखना चाहते हैं. कुछ समर्थकों ने तो यहां तक कहा कि अगर आलाकमान ने जल्द इस मामले में कोई उचित कदम नहीं उठाया तो वह राज्य में कांग्रेस से अलग होकर नई पार्टी की भी घोषणा कर सकते हैं. पार्टी में टूट का खतरा बना हुआ है.





