अखिलेश यादव की कोशिशों के चलते यूपी में समाजवादी पार्टी का मेकअप भले ही साफ-सुथरा दिखायी पड़ने लगा हो, लेकिन पार्टी में गुंडागर्दी की जड़ें अभी भी गहरे तक धंसी हुई हैं। उन्नाव में सपा के विधायक और पारिवारिक जघंन्य आपराधिक इतिहास वाले कुलदीप सिंह सेंगर के भाइयों ने इस बार अपने इशारे पर न चलने वाले एक पत्रकार को कचहरी और एसपी दफ्तर के चंद कदम दूर बुरी तरह पीट दिया तो दूसरी तरफ सपा के एक अन्य विधायक ने लोक निर्माण विभाग के दफ्तर में घुसकर अधिशासी अभियंता समेत पूरे स्टाफ को असलहा दिखाकर धमकाया। पुरवा के विधायक की मांग थी कि बिना उसकी इजाजत के अब किसी का भी भुगतान हर्गिज नहीं किया जाएगा। जाहिर है कि उनकी मंशा यह है कि अब सरकारी भुगतानों में वे अपना हिस्सा हर कीमत पर वसूलेंगे।
उन्नाव में मीडिया पर गुंडागर्दी की एक नई इबारत सपा के विधायक के स्याह-काले बिजनेस का देखने वाले उनके भाई मनोज सिंह सेंगर ने लिखा। तारीख सात मार्च, जब जीत के जश्न में मनोज पूरे इलाके में अपनी हैसियत दिखाने की कोशिश करते हुए दबंगों का जुलूस निकाल रहे थे, कि कलेक्ट्री और कप्तान के दफ्तर के चंद कदमों दूर दो-ढाई दर्जन मोटर बाइक के समूह वाला यह जुलूस गुजर रहा था कि अचानक ही एक अखबार के स्थानीय रिपोर्टर अमित मिश्र पर मनोज सेंगर की नजर पड़ गई। मनोज की ललकार पर जुलूस में शामिल गुंडों ने अमित पर हमला बोल दिया। मनोज सेंगर उनके अखबार में प्रकाशित खबरों के चलते अमित मिश्र से खार बैठा हुए था।
बहरहाल, इस गुंडादल का नेतृत्व कर रहे मनोज ने अपने असलहों की दुकान के पास ही अमित को धर दबोचा और जमकर पिटाई की। हाथ-पैर से मारते हुए इन गुंडों ने सड़क पर भी अमित को घसीटा था और वहां मौजूद सहमे हुए लोगों को ललकारते हुए धमकाया कि अगर उनके खिलाफ जुबान ने खोलने कर कोशिश की तो ऐसे ही हर शख्स के साथ किया जाएगा। करीब तीन घंटों तक पीटने और बंधक बनाए रखने के बाद मनोज सिंह सेंगर ने बाद में वरिष्ठ पत्रकारों ने हस्तक्षेप के बाद अमित को रिहा किया।
कहने की जरूरत नहीं कि मनोज सेंगर दिखाने के नाम पर तो स्वतंत्र भारत का जिला संवाददाता बनाता है, जबकि उसके दर्जनों भर गुंडे साथी खुद को पत्रकार बताते फिरते हैं। मनोज पर गैंगेस्टर समेत अनेक मुकदमे बताये जाते हैं। आपराधिक परिवार की पृष्ठभूमि वाले विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के एक तीसरे भाई अतुल सिंह सेंगर पर करीब सात साल पहले उन्नाव के एक अपर पुलिस अधीक्षक रामलाल को गोली मार दिए जाने का आरोप है। कई बरसों तक इस अधिकारी का इलाज चलता रहा। इस अधिकारी की गलती इतनी थी कि इसने बालू खनन माफिया की गैंग को तोड़ने की कोशिश की थी।
एक साल पहले ही कानपुर से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के रिपोर्टर के पिता पर भी अतुल ने जानवाले हमला किया था। ऐसे ही जघन्य अपराधों के बल पर यह विधायक परिवार उन्नाव में आतंक का पर्याय बन चुका है, और सपा की सरकार बनने की संभावना हो जाने के बाद ही इन लोगों ने अमित मिश्रा पर हमला करते हुए सरेआम धमकी दी है कि अब उन्नाव में उन लोगों के खिलाफ बोलने वालों का यही हश्र होगा। इसी आतंक का असर है कि अमित के अपने अखबार से लेकर स्थानीय मीडिया ने इन लोगों के खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।
उधर, पुरवा से विधायक उदयराज यादव ने बीती दोपहर जो हंगामा और गुंडई की हौलनाक हरकत पीडब्ल्यू कार्यालय में की है, उससे सरकारी अमला भी स्तब्ध है। चर्चा होने लगी है कि अब उन्नाव में गुंडागर्दी और उगाही का दौर शुरू होने वाला है। सपा आम जनता से लाख गुंडागर्दी ना होने का वादा करके सत्ता में आई हो और मुलायम तथा अखिलेश ने कानून व्यस्था को हाथ में लेने
वाले सपाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई करने का ऐलान किया हो, परन्तु सपाइयों की गुंडई पर रोक लगाना इतना आसान नहीं होगा। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। उन्नाव के अलावा भी कई जिलों 'गुंडई कायम है' की चपेट में आ चुके हैं.
लेखक कुमार सौवीर वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये हिदुस्तान, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, महुआ, यूपी टीवी समेत कई संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता में जुटे हुए हैं.






