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बेइमान अफसरों ने अखिलेश को चारों ओर से घेरना शुरू कर दिया

: युवा मुख्यमंत्री लुटेरे अफसरों से बचें : बहुत उम्मीद है अखिलेश से। युवा हैं। ऊर्जावान हैं। अभी तक भ्रष्टाचार से दूर हैं। कुछ परिवर्तन करना चाहते हैं। सत्ता की नई परिभाषायें स्थापित करना चाहते हैं। देखना यह है कि क्या वह जनता की उम्मीदों पर उतना ही खरा उतर पायेगा जितनी जनता ने अपेक्षा की है। इस प्रदेश ने 20 सालों में बहुत बुरा दौर देखा है और अब वह कुछ और बुरा देखने की स्थिति में नही है। अखिलेश के सामने सबसे बड़ी समस्या नौकरशाहों की आने वाली है। इन लोगों ने एक संगठित गिरोह बना लिया है जिससे यह लोग हजारों करोड़ के वारे-न्यारे करने में जुटे हैं और गरीबों को उनका हक नहीं मिलने दे रहे हैं।

: युवा मुख्यमंत्री लुटेरे अफसरों से बचें : बहुत उम्मीद है अखिलेश से। युवा हैं। ऊर्जावान हैं। अभी तक भ्रष्टाचार से दूर हैं। कुछ परिवर्तन करना चाहते हैं। सत्ता की नई परिभाषायें स्थापित करना चाहते हैं। देखना यह है कि क्या वह जनता की उम्मीदों पर उतना ही खरा उतर पायेगा जितनी जनता ने अपेक्षा की है। इस प्रदेश ने 20 सालों में बहुत बुरा दौर देखा है और अब वह कुछ और बुरा देखने की स्थिति में नही है। अखिलेश के सामने सबसे बड़ी समस्या नौकरशाहों की आने वाली है। इन लोगों ने एक संगठित गिरोह बना लिया है जिससे यह लोग हजारों करोड़ के वारे-न्यारे करने में जुटे हैं और गरीबों को उनका हक नहीं मिलने दे रहे हैं।

अखिलेश यादव की अभी ताजपोशी भी नहीं हो पायी कि इन बेइमान अफसरों ने अखिलेश को भी चारो ओर से घेरना शुरू कर दिया है। टीवी पर सबसे पहले एक खबर दिखाई दी कि एनआरएचएम घोटाले के सबसे बड़े सूत्रधार प्रदीप शुक्ला मुलायम सिंह यादव के घर पहुंचे। यह वही घोटाला है जिसने दो सीएमओ और एक डिप्टी सीएमओ की जान ले ली। इस घोटाले में गरीबों का इस तरह हक मारा गया जिसकी कोई कल्पना भी नही कर सकता। गर्भवती महिलाओं को दी जाने वाली दवायें, आंखों की रोशनी खो रहे लोगों के उपचार के लिए आए चश्मे, बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के उपाय जैसी हजारों करोड़ रुपये की योजनायें इस प्रदेश में धूमिल हो गई क्योंकि इन योजनाओं को चलाने की मुख्य भूमिका प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ला की थी और वे दलाल की भूमिका निभाते हुए विभागीय मंत्री के साथ घिनौना गठजोड़ निभाने में व्यस्त थे।

युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यह भी समझना होगा कि इस घोटाले में मंत्री सहित एक दर्जन लोगों को सीबीआई ने हिरासत में ले लिया मगर प्रदीप शुक्ला पर अभी तक आंच भी नही आयी। माना जाता है कि कांग्रेस के आला नेता विद्याचरण शुक्ल की सरपरस्ती के कारण सीबीआई प्रदीप शुक्ला पर हाथ डालने से बच रही है। चर्चा में प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात एक आईएएस अफसर का नाम भी है जो शुक्ला को बचाने के लिए दिन रात एक कर रहे हैं। प्रदीप शुक्ला सिर्फ इसलिए बचे हैं क्योंकि उनकी पत्नी सहित आधा दर्जन रिश्तेदार आईएएस अफसर हैं। सवाल यह है कि अगर इतने रिश्तेदार आईएएस हैं तो क्या एक आईएएस को खुलेआम लूट मचाने की अनुमति दी जायेगी।

यहां इतना लंबा जिक्र करना जरूरी भी नही था, मगर एक नौजवान मुख्यमंत्री को यह जानना जरूरी है कि इस प्रदेश में कदम-कदम पर प्रदीप शुक्ला जैसे अफसर भरे पड़े हैं जो मंत्रियों और मुख्यमंत्री को गुमराह करके प्रदेश में भ्रष्टाचार की नई-नई धाराएं बहाने को बेताब बैठे हैं। उनके पिता मुलायम सिंह के कार्यकाल में भी प्रदीप शुक्ला जैसे अफसरों की कोई कमी नही थी। खुद प्रदीप शुक्ला जैसे अफसर भी अपनी चमचागिरी के दम पर सपा सरकार में भी महत्वपूर्ण तैनाती पाते रहे और सरकार बदलते ही बहन जी के चरणों में जगह पा गए। यह सिलसिला आईएएस अफसरों पर भी लागू रहा और आईपीएस अफसरों पर भी।

मेरे एक ब्यूरोक्रैट मित्र का कहना था कि राजनेताओं को वही अफसर पसंद आते हैं जो वर्दी पहनकर भी सबके सामने मुख्यमंत्री के पैर छूने में हिचक महसूस न करें। वर्दी में सिर पर कैप लगाकर सैल्यूट करना तो उनकी नौकरी में शामिल है। अच्छी बात वही होती है जो अफसर इससे आगे बढ़कर पैर छूता नजर आए। अभी अखिलेश युवा हैं और इस चैकड़ी से दूर है। मगर यूपी में तैनात और दिल्ली से वापस आये कुछ भ्रष्ट अफसरों ने उनकी मंडली में शामिल होने के लिए दिन रात एक कर दिया है। इनमें से एक अफसर तो ऐसे हैं कि जहां-जहां तैनात रहे वहां कोई न कोई बड़ा काम्प्लेक्स उनके रिश्तेदारों के नाम से खड़ा हो गया। अब वह दावा कर रहे हैं कि पंचम तल पर उनकी नियुक्ति तय है और उनके इस दावे में सच्चाई भी नजर आ रही है क्योंकि नोएडा और दिल्ली की बड़ी गाडिय़ों से आए उद्योगपति हाथ में बड़े-बड़े गिफ्ट लेकर उनके पास दरबार लगाए नजर आने लगे हैं। अखिलेश अच्छी तरह जानते होंगे कि नौकरशाही कभी किसी की नही होती। सत्ता बदलते ही नये हुक्मरानों के पैर पकडऩा इनकी सबसे बड़ी खासियत होती है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने इनकी तुलना वैश्या से की थी और मौजूदा दौर में नौकरशाही ने जो रूप अपना लिया है उससे लगता है कि यह तुलना गलत भी नही थी।

मुख्यमंत्री को यह भी समझना होगा कि प्रदेश की राजधानी से लेकर जिलों तक भ्रष्टाचार का यह नंगा तांडव लगातार चल रहा है। जिलों में राशन का सामान नही बंटता क्योंकि राशन की ब्लैकमनी का पैसा कोटेदार से लेकर कलेक्टर तक जाता है। चाहे विधायक निधि हो या सांसद निधि। चाहें पीडब्ल्यूडी का निर्माण कार्य हो या फिर ब्लाक का निर्माण कार्य कलेक्टर के दो प्रतिशत कमीशन को उनके घर तक पहुंचाना लाजिमी है। शासन में बैठे प्रमुख सचिव स्तर के अफसरों ने दलाली की नई-नई दुकाने खोल ली हैं।  इनके बारे में जानकारी मांगने पर सूचना का अधिकार लागू होने पर भी कोई जानकारी आम तौर पर नहीं दी जाती और उल्टा जानकारी मांगने पर व्यक्ति को धमकाया जाता है।


इसे भी पढ़ सकते हैं- नवनीत सहगल ने सपा को सेट कर लिया


अभी तक अखिलेश यादव के तेवरों से लगता है कि वह प्रदेश में बदलाव की एक नयी गाथा लिखना चाहते हैं मगर यह गाथा तब तक नहीं लिखी जा सकती जब तक इन भ्रष्ट नौकरशाहों पर अंकुश नहीं लगाया जाता। इस प्रदेश को बहुत दिनों बाद आशा की किरण दिखाई दी है। हम सबको दुआ करनी चाहिए कि बड़े सपने लेकर सत्ता में बैठ रहा नौजवान इन भ्रष्ट अफसरों को उनकी औकात बताए और इस बार पंचम तल पर वही अफसर तैनात हों जिनकी छवि इमानदार अफसर की हो न कि अब तक रहे लुटेरे अफसरों की…उम्मीद है अखिलेश ऐसा ही करेंगे।

लेखक‍ संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं और वीकएंड टाइम्‍स अखबार के संपादक हैं.

 

 
 

 
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