इंदौर। करीब डेढ़ साल पहले इंदौर के बीपीएन टाईम्स के एक पत्रकार अनिल सोनी की हत्या में मास्टर माइंड माने जाने वाले शाकिर चाचा व उसके छह साथियों को सेशन कोर्ट ने हत्या के मामले से गुरुवार को बरी कर दिया है। अलबत्ता शाकिर व उसके एक साथी को गैरकानूनी रूप से हथियार रखने के जुर्म में दो साल की सजा सुनाई है।
अभियोजन कहानी के मुताबिक घटना 4 अक्टूबर 2010 की जीएसआईटीएस तिराहे पर रात को हुई थी। जब बीपीएन टाईम्स समाचार पत्र में संवाददाता के तौर पर काम करनेवाला अनिल सोनी मोटरसाईकिल पर जा रहे थे तब उसे एमपी 09 एलएल -9519 पर सवार इमरान पिता इफ्तेखार 25 निवासी जवाहर मार्ग व व फिरोज पिता गुलाम हुसैन 22 निवासी चंदननगर ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। उन्हें गंभीर हालत में उनके मामा रूपा सोनी एमवाय अस्पताल ले गए थे, जहां अनिल को मृत घोषित किया गया था।
घटना का कारण यह सामने आया था कि मृतक की मां मंजूला सोनी ने संतोष दुबे हत्याकांड के आरोपी जीतू यादव से दूसरी शादी की थी और उक्त हत्याकांड की पेशी के दौरान उसे संतोष के भाई गुड्डू दुबे ने धमकाया था, बाद में शाकिर को कोर्ट पेशी के दौरान ब्लेड मारने की घटना की रिपोर्ट भी अनिल ने छापी थी, जिससे शाकिर उसे अपना दुश्मन मानने लगा था। हांलाकि यह भी चर्चा थी कि अनिल एक बेशकीमती जमीन का सौदा पटाने में लगा था, इसी विवादित जमीन के चक्कर में एरोड्रम थाना क्षेत्र में यवल सोमानी की हत्या हुई थी, जिसमें संतोष दुबे का हाथ बताया जा रहा था।
मामला अपर सत्र न्यायाधीश डीएन मिश्र की अदालत में चला जहां सागर की फारेंसिंक लैब से मिली बेलेस्टिक रिपोर्ट में हत्या में प्रयुक्त देशी कट्टा मेल नहीं खा पाया। इसी तरह कट्टे की गोली का खाली खोखा भी घटनास्थल से नहीं मिला था और चश्मदीद गवाह भी विरोधाभासी बयान दे गए थे। नतीजतन कोर्ट ने बुधवार को शाकिर, इमरान, फिरोज के अलावा उनके साथी असलम उर्फ भोला, फारूख हुसैन व शूटर चंदन को आईपीसी की धारा 302, 120 (बी) व 34 से बरी कर दिया है। अलबत्ता शाकिर व फिरोज के पास देशी कट्टा व एक जिंदा कारतूस जब्त होने पर उन्हें दो साल के कारावास की सजा सुनाई है और एक-एक हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया गया है।





