रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति का शिकार होना पड़ा. ममता ने अपने मंत्री को केंद्र सरकार के खिलाफ एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया. ममता किराया न बढ़ाने के लिए दिनेश त्रिवेदी को पहले भी कह सकती थीं. हो सकता है कि इस राजनीतिक पैंतरेबाज़ी में पूरी पार्टी शामिल हो. बहरहाल दिनेश त्रिवेदी अब रेल मंत्री नहीं रहे. ये तस्वीर उनके उत्तराखंड के नैनीताल जिले के धानाचूली कस्बे के काटेज की है जो कि उनकी पत्नी के नाम पर ख़रीदा गया है. शायद अब त्रिवेदी यहीं आकर हिमालय दर्शन करेंगे.
कहने वाले कहते हैं कि हालाँकि दिनेश त्रिवेदी का रेल बजट उनकी दूरगामी सोच के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा. पर यह भी कहा जा रहा है कि आखिर कुछ भी नया करने के लिए जनता की जेब काटना क्यों जरूरी है. यह भी कहा जा रहा है कि ममता ने दिनेश त्रिवेदी को बार बार किराया बढ़ाने से मना किया पर त्रिवेदी कांग्रेस के बहकावे में आकर किराया बढ़ा गए और आज जरूर वो पछता रहे होंगे. खैर, त्रिवेदी जी अपनी सुंदर सी काटेज में कुछ दिन गुजारेंगे, प्राकृतिक माहौल में तो उन्हें समझ में आयेगा कि उन्होंने क्या खोया और क्या पाया.

उत्तराखंड के टीवी जर्नलिस्ट दिनेश मानसेरा की रिपोर्ट.





