आज सुबह कई अखबारों में सहारा समूह की तरफ से फुल पेज का विज्ञापन था. अखिलेश के मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के उपलक्ष्य में. उन्हें सहारा ने जी भर कर बधाइयां दी. पूरे पेज के इस कलर विज्ञापन को देखकर बहुतों के मन में सवाल खड़ा हुआ, और कइयों के कान भी खड़े हो गए. आखिर सहारा ग्रुप को भला क्या पड़ी है कि वह यूपी में किसी के सीएम बनने पर फुल पेज का विज्ञापन देकर खुशियां मनाए. पर कहने वाले कहते हैं कि सहारा वालों की सपा से बहुत अच्छी सेटिंग है.
सपा के आने से सहारा का धंधा भी खूब फलता फूलता है. यूपी में सहारा का चिटफंड का काम यहां वहां जहां तहां सर्वत्र हो रहा है. सहारा को जमीन से लेकर प्रोजेक्ट तक चाहिए होते हैं. अखबार, रीयल इस्टेट समेत कई तरह के कारोबार के लिए सहारा प्रबंधन सरकार पर डिपेंड करता है. सहारा का मुख्यालय लखनऊ में है, और लखनऊ में सहारा के कई माल, शहर आदि तक हैं. गोरखपुर को सहाराश्री सुब्रत राय की कर्मभूमि संघर्षभूमि आदि बताया जाता है.
तो भई, सहारा वाले क्यों न तेल लगाएं सपा और अखिलेश को. इसीलिए सहारा प्रणाम का शुरुआत करते हुए इन लोगों ने फुल पेज का विज्ञापन दिया है अखबारों को. खुद सहारा के सभी एडिशन्स में फुल पेज विज्ञापन छपा है. एक सज्जन भड़ास को पत्र लिखकर पूछते हैं- ''आज के अख़बारो को देखा तो सोचा कुछ लिखूं. सहारा परिवार ने अखिलेश की ताजपोशी पर दिया कई अख़बारो में फुल पेज का विज्ञापन. इसके पीछे क्या है राज? कौन है मजबूरी? क्या है गणित? क्यूं पड़ी ज़रूरत? सवाल मथ रहे हैं. दैनिक जागरण, गोरखपुर के आख़िरी पन्ने और राष्ट्रीय सहारा, गोरखपुर के आख़िरी पन्ने पर फुल पेज विज्ञापन देख सकते हैं.'' क्या आपको भी कुछ पता है कि सहारा और सपा के बीच क्या चक्कर-घनचक्कर है? अगर हां तो कुछ हमें भी समझाएं, बताएं.

-यशवंत सिंह, एडिटर, भड़ास4मीडिया





