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लखनऊ में दिखी सपा की सत्‍ता एवं पार्टी की खुलेआम खिचड़ी

समाजवादी पार्टी की सत्‍ता और पार्टी की खुलेआम खिचड़ी पर अराजकता की छौंक लोगों को बहुत बेहाल कर गयी। नये मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण में जोश के बजाय मदहोश का माहौल रहा। शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रेस कांफ्रेंस में किसी नये महत्‍वपूर्ण पर मसले की बजाय बेरोजगार भत्‍ता का आधा-अधूरा मामला उठा।

समाजवादी पार्टी की सत्‍ता और पार्टी की खुलेआम खिचड़ी पर अराजकता की छौंक लोगों को बहुत बेहाल कर गयी। नये मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव के शपथ ग्रहण में जोश के बजाय मदहोश का माहौल रहा। शपथ ग्रहण समारोह के बाद प्रेस कांफ्रेंस में किसी नये महत्‍वपूर्ण पर मसले की बजाय बेरोजगार भत्‍ता का आधा-अधूरा मामला उठा।

कुण्‍डा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह के कई आपराधिक मामलों में लिप्‍त होने के बावजूद सपा सरकार में शामिल करने के मसले पर अखिलेश ने कोई संतोषजनक उत्‍तर नहीं दिया बल्कि खुद ही पत्रकारों की तरफ सवाल उछाल दिया। अखिलेश ने राजा भैया की वकालत करते हुए साफ कर दिया कि किसी पर अपराध का मामला दर्ज हो जाने से उसे अपराधी नहीं माना जा सकता, जब तक कि कोर्ट में ये साबित न हो जाए। और खत्‍म हो गयी पत्रकारों के सवालों की झड़ी।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद सरकार में अपने 47 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद अखिलेश यादव जब पत्रकारों से बात कर शुरू किये तो हैरतनाक तरीके से उनके बगलनशीं बैठे सपा के प्रवक्‍ता राजेद्र चौधरी। कहने की जरूरत नहीं कि यह पहली घटना रही जब मुख्‍यमंत्री के आधिकारिक प्रेस कांफ्रेंस में सरकार के साथियों की बजाय सीधे समाजवादी पार्टी के प्रवक्‍ता को ही बगल में बैठा लिया गया। यानी अखिलेश यादव ने मुख्‍यमंत्री के तौर पर एक नई परम्‍परा कायम कर की, अब सरकार के लोग नहीं, सीधे सपा के लोग ही तरजीह पाएंगे।

हालांकि इसके पहले बसपा की सरकार में कुछ ऐसी ही कुछ करतूतें हुईं थीं, जब प्रदेश बसपा के प्रदेश अध्‍यक्ष स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने मुख्‍यमंत्री कार्यालय के एनेक्‍सी भवन में पार्टी की तरफ से प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर ली थी। लेकिन तब उस समय तात्‍कालीन मुख्‍यमंत्री मायावती वहां मौजूद नहीं थीं। लेकिन अखिलेश यादव तो इस मामले में इस से भी कई कोस आगे बढ़ गये। उधर शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सपाइयों ने जो हंगामा वह भी शर्मनाक भी रहा। जोश के नाम पर अराजकता का जो हंगामा हुआ, वह भी ऐतिहासिक और अभूतपूर्व ही था। पुलिस को यह सब सम्‍भालने में खासी मशक्‍कत करनी पड़ी और इसे सम्‍भालने में कई बार पुलिस वालों को अपमानित भी होना पड़ गया।

लेखक कुमार सौवीर वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. ये हिदुस्‍तान, दैनिक जागरण, दैनिक भास्‍कर, महुआ, यूपी टीवी समेत कई संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. फिलहाल स्‍वतंत्र पत्रकारिता में जुटे हुए हैं.

 

 
 

 
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