उदयपुर में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका शुक्रवार को अपने पाठकों तक नहीं पहुंच पाया. दोनों अखबारों की एक भी प्रतियां वितरित नहीं हो पाईं. रीजनल संस्कारण को भी हॉकरों ने यूनिट से बाहर नहीं जाने दिया. हॉकर कमिशन बढ़ाने की मांग को लेकर काफी समय से आंदोलनरत हैं. फरवरी में भी इन लोगों ने हड़ताल की थी परन्तु पत्रिका एवं भास्कर के मैनेजमेंट के आश्वासन पर इन्होंने आंदोलन रद कर दिया था. बताया जा रहा है कि यह हड़ताल आगे भी जारी रह सकता है.
उदयपुर में राजस्थान पत्रिका ढाई रुपये तथा दैनिक भास्कर सवा दो रुपये में बिकता है. इसमें हॉकरों को 65 से 70 पैसे कमिशन के तौर पर मिलते हैं. हॉकर काफी समय से कमिशन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले दस सालों से हॉकरों के कमिशन में कोई वृद्धि नहीं हुई जबकि महंगाई और खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है. फरवरी में हॉकरों के आंदोलन के बाद दोनों अखबारों के मैनेजमेंट ने इस मामले का हल निकालने का आश्वासन दिया था परन्तु इस पर कोई कदम नहीं उठाया जा सका, जिसके चलते हॉकर एक बार फिर हड़ताल पर उतर गए हैं.
दैनिक भास्कर की प्रतियां तो कल से ही हॉकरों ने नहीं बंटने दी हैं. आज भास्कर और पत्रिका दोनों अखबारों का वितरण पूरी तरह ठप कर दिया. हॉकर दोनों अखबारों के यूनिट के सामने लेट गए तथा अखबार लदा एक भी वाहन बाहर नहीं जाने दिया, जिससे ग्रामीण संस्करण भी यूनिट से बाहर नहीं भेजे जा सके. बताया जा रहा है कि हॉकर राजस्थान पत्रिका तथा दैनिक भास्कर प्रबंधन से अखबार की कीमत का पचास प्रतिशत कमिशन के रूप में देने की मांग पर अड़े हुए हैं. इसके चलते ही बात नहीं बन पा रही है. जिस तरह की स्थिति है उससे कल भी आंदोलन खतम होने की संभावना कम ही दिख रही है.
दोनों अखबार के मैनेजमेंट हॉकरों से कह रहे हैं कि अगर उनका विरोधी अखबार कमिशन बढ़ाता है तो वे भी कमिशन बढ़ा देंगे. इससे हालात और बिगड़ गए हैं. यूनिटों पर धरना देने के बाद हॉकरों का समूह पूरे शहर में जुलूस भी निकाला. दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका के अखबारों के पाठकों तक नहीं पहुंच पाने के चलते छोटे अखबारों की मांग बढ़ गई है, लोग स्थानीय खबरों के बारे में जानकारी के लिए छोटे अखबारों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. सांध्य अखबारों की बिक्री भी कल से बढ़ी हुई है.





