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मध्य प्रदेश के ज्यादातर पत्रकारों को मनरेगा से भी कम मजदूरी!

मध्यप्रदेश की पत्रकारिता आगामी दो से तीन सालों में छिन्न-भिन्न हो सकती है जिसका मुख्य कारण महंगाई के अनुसार पत्रकारों को संतोषजनक वेतन ना मिलना होगा। साथ ही नए बड़े ग्रुप द्वारा मध्यप्रदेश से किनारा करने के कारण प्रदेश की पत्रकारिता बुरी तरह से चरमरा सकती है। हालांकि अगामी वर्ष में यहां विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं इस वजह से कुछ स्थानीय मीडिया अपने बजट को बढ़ाकर अच्छा खासा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रही है लेकिन चुनाव के बाद ये धीरे-धीरे डाक कापी में ही सिमट सकते हैं। इस बीच आने वाले नए चैनल भी चुनाव के बाद अचानक लुप्त हो जाएंगे। मध्यप्रदेश में पत्रकारिता की घटती लोकप्रियता के मुख्य कारण पत्रकारिता का बाजारवाद की ओर जाना है।

मध्यप्रदेश की पत्रकारिता आगामी दो से तीन सालों में छिन्न-भिन्न हो सकती है जिसका मुख्य कारण महंगाई के अनुसार पत्रकारों को संतोषजनक वेतन ना मिलना होगा। साथ ही नए बड़े ग्रुप द्वारा मध्यप्रदेश से किनारा करने के कारण प्रदेश की पत्रकारिता बुरी तरह से चरमरा सकती है। हालांकि अगामी वर्ष में यहां विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं इस वजह से कुछ स्थानीय मीडिया अपने बजट को बढ़ाकर अच्छा खासा मुनाफा कमाने की कोशिश कर रही है लेकिन चुनाव के बाद ये धीरे-धीरे डाक कापी में ही सिमट सकते हैं। इस बीच आने वाले नए चैनल भी चुनाव के बाद अचानक लुप्त हो जाएंगे। मध्यप्रदेश में पत्रकारिता की घटती लोकप्रियता के मुख्य कारण पत्रकारिता का बाजारवाद की ओर जाना है।

यहां हर महीने तीन से चार नए इलेक्ट्रानिक मीडिया के दफ्तर खुलते हैं जो प्रदेश के बाहर से संचालित होते हैं और कुछ ही महीनों बाद बंद हो जाते हैं। इस कड़ी में एमके न्यूज, वायस आफ इंडिया का नाम सबसे ऊपर आता है। वहीं टीवी24, भारत समाचार, टीवी99 जैसे चैनल बंद होकर चालू हुए। इसी तरह 60 प्रतिशत चैनलों व पेपरों में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी काम कर रहे हैं। कुछ जगहों पर तो मनरेगा से भी कम मजदूरी दी जाती है। यहां पत्रकारों का इतना बुरा हाल है कि अब युवाओं को पत्रकारिता से नफरत होने लगी है। पत्रकारिता के गुणवक्ता का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पैसा देकर कोई भी समाचार छपाया जा सकता है।

दरअसल प्रदेश में एक दो संस्थानों को छोड़कर सभी में वर्तमान वेतन महंगाई के अनुपात के हिसाब से लगभग नगण्य है। पत्रकारों को मिलने वाला वेतन तो आगामी वर्षों तक स्थिर रहेगा, इस बीच प्रतिवर्ष महंगाई में 12 से 15 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इस हिसाब से वर्ष 2014 में राजधानी भोपाल में रहने वालों का कुल खर्च लगभग 10 हजार कम से कम होगा। लेकिन इस बीच पत्रकारों का औसत वेतन 7 से 8 हजार दिया जाएगा। जिस वजह से युवा पीढ़ी का दूर जाना तय है। वहीं 40 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों द्वारा कंप्यूटर फ्रेंडली न होने के कारण 70 प्रतिशत से अधिक पत्रकारों की छुट्टी हो गई। इस वजह से आगामी समय में पत्रकारों की सख्त जरूरत पड़ेगी लेकिन मालिको की हठधर्मिता के कारण वेतन वहीं रहेगा। इस वजह के कई छोटे संस्थानों का 2014 में टूटना तय माना जा रहा है। युवाओं की बढ़ती दूरी के कारण प्रेस व मीडिया में गुणवत्ता की कमी आएगी। इसका दुष्परिणाम अभी से भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सतना में देखने को मिल सकता है। यदि इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मध्य प्रदेश में पत्रकारिता का भविष्य खुद ही खतरे में पड़ सकता है।

महेश्वरी प्रसाद मिश्र

पत्रकार

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