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जैसे बेटे सूरज प्रकाश को मिले, वैसे सबको मिलें….

Suraj Prakash : मेरे साठवें जन्म दिन की पूर्व संध्या पर मेरे प्यारे बेटों अभिजित और अभिज्ञान ने मुझे अदभुत उपहार दिया है। आगे आने वाले दिनों में ये उपहार न केवल मेरा हर वक्त का संगी साथी रहा करेगा बल्कि मुझे ये भी याद दिलाता रहेगा कि मैं कितना खुशनसीब पिता हूं कि मेरे बच्चे मेरा इतना ख्याल रखते हैं। मेरे मित्र जानते ही हैं कि कुछ ही दिन पहले मैंने अपना पूरा पुस्तकालय फेसबुक के जरिये अन्य पुस्तकालयों और परिचितों, अपरिचित मित्रों को उपहार में दे दिया था और बेटियों जैसी 4000 किताबों की विदाई के बाद घर एकदम खाली खाली लगने लगा था। मेरे बच्चों ने मुझे एक नया पुस्तकालय ही उपहार में दे दिया है।

Suraj Prakash : मेरे साठवें जन्म दिन की पूर्व संध्या पर मेरे प्यारे बेटों अभिजित और अभिज्ञान ने मुझे अदभुत उपहार दिया है। आगे आने वाले दिनों में ये उपहार न केवल मेरा हर वक्त का संगी साथी रहा करेगा बल्कि मुझे ये भी याद दिलाता रहेगा कि मैं कितना खुशनसीब पिता हूं कि मेरे बच्चे मेरा इतना ख्याल रखते हैं। मेरे मित्र जानते ही हैं कि कुछ ही दिन पहले मैंने अपना पूरा पुस्तकालय फेसबुक के जरिये अन्य पुस्तकालयों और परिचितों, अपरिचित मित्रों को उपहार में दे दिया था और बेटियों जैसी 4000 किताबों की विदाई के बाद घर एकदम खाली खाली लगने लगा था। मेरे बच्चों ने मुझे एक नया पुस्तकालय ही उपहार में दे दिया है।

कथाकार सूरज प्रकाश

कथाकार सूरज प्रकाश

इस पुस्तकालय में मेरी पसंद की किताबें रहा करेंगी। पहले सारे घर में किताबें बिखरी रहती थीं अब ये वाला पुस्तकालय हर वक्त मेरी जेब में रहा करेगा। इस पुस्तकालय का आकार है लगभग 6 इंच X 4 इंच और इसमें लगभग 1400 पुस्तकें समा सकती हैं। इतना ही नहीं, मैं पहले की तरह मित्रों को पुस्तकें उपहार में देता रह सकता हूं, नयी किताबें, अखबार और पत्रिकाएं खरीद सकता हूं। मेरा पुस्तकालय हर वक्त मेरे पास। न चोरी का घर, न दीमक की चिंता। न कैटेलागिंग का झंझट और न ही किताबें गुम जाने की फिक्र। 160 ग्राम के इस पुस्तकालय का नाम है KINDLE और ये amazon.com की अनुपम भेंट है। wi-fi के जरिये किताबें खरीदें या डाउनलोड करें। मिनटों में। ई बुक्स के रूप में। अब तो हिंदी में भी ई बुक्स आने लगी हैं। मैंने तो रातों-रात अपना सारा साहित्य pdf में कन्वर्ट करके इसमें डाल दिया है। न पेनड्राइव की चिंता, न वायरस का डर। जहां मर्जी जिस रचना का पाठ करना हो, पूरी लाइब्रेरी साथ में। शायद इसी को कहते हैं – कर लो दुनिया मुट्ठी में। थैंक यू माय डीयर अभिजित एंड अभिज्ञान.

कुछ टिप्पणियां–
        Padmasambhava Shrivastava : पुस्तकों से बढती दूरियों को बढ़ाने में सपन्न ई-पाठकों की भूमिका भी कम नहीं है, पहले से विपन्न आम पाठकों को प्रति वर्ष मुद्रित पुस्तकों का अधिक मूल्य चुकाना पड़ रहा है. तकनीकी विलगन के कारण उन्हें विवशतावश भी इन्हीं मुद्रित पुस्तकों पर अपनी रूचि को सांसें देना पड़ता है. एमर्सन की उक्ति भी स्मरण है–' नई किताबें पढों, पुरानी कोट पहनो..! आम पाठकों ही रचनाकारों को प्रकाशन की दुनिया में ठहाके लगाने का यथेष्ठ अवसर दिलाते हैं. मेरी इस टिप्पणी को अन्यथा नहीं लेंगे और पुनः विचार करेंगे कि कई लेखक-कवि केवल लेखन के बल पर ही गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे हैं.
 
       Suraj Prakash : मैं सहमत हूं लेकिन लेखक के लिए दुनिया जहान के पाठक दिलाने में नेट की भूमिका से आप इनकार नहीं कर सकते। नावां न सही, पाठक तो मिल रहे हैं।
 
       Neelam Anshu : सचचमुच अनमोल तोहफा। बधाई और अग्रिमं शुभकामनाएं।
 
       Ramesh Upadhyaya : जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ. जी तोहफा आपको मिला है, गत वर्ष मुझे मेरे मित्र मुकुल और उनकी पत्नी चारु ने दिया था.
 
       Devdeep Mukherjee : अदभुत सूरजजी,,,लेकिन जो सृजक तमामतर जिंदगी लिखे को पढता रहा उसे स्‍लेट पर लिखी को बांचना होगा….फिर भी दोनों नौनिहाल को प्रणाम कि हमारे मित्र के पुस्‍तकालय के अभाव को वे महसूस नहीं करने देना चाहते….कोई एक किताब अगर बची हो आपके पुस्‍तकालय में तो इस नाचीज को भेज दीजिए…जानता हूं,,देर हो गई है पर देर आयद दुरस्‍त आयद…….

        Devdeep Mukherjee : और जन्‍मदिन की पूर्व संध्‍या पर आपका अभिनंदन…..जिए और अनेक साल और लिखते रहें……हम सबके लिए….

        Prem Janmejai : सूरज भाई हार्दिक बधाई, ऐसे प्यार करने वाले बच्चे सबको मिलें , इन्होने सिद्ध कर दिया है की हमारी युवा पीढ़ी जिसे हम यांत्रिक और संवेदनहीन समझने लगे हैं , उसके मन में अपनों के लिए कितना प्यार छुपा है, ऐसी संतान पाकर निश्चय ही माता पिता एक असीम सुख का अनुभव करते हैं अभिजीत और अभिज्ञान को बहुत बहुत प्यार , और आपको और मधु को ऐसे संस्कार देने के लिए प्रणाम. ऐसा जन्मदिन आपके जीवन में हर बार आये जो आपको संतोष दे

        Jeengar Durga Shankar Gahlot : आदरणीय सूरज प्रकाश जी, ६ दशकों का पूरा होता यह सफ़र इसी सहजता, सोम्मयता व स्वस्थता के साथ अनवरत जारी रहे तथा जारी रहे आपका लेखन. मंगलमयी शुभ कामनाओं के साथ. – जीनगर दुर्गा शंकर गहलोत, मकबरा बाज़ार, कोटा – ३२४ ००६ (राज.) ; मोब.नं. : ०९८८७२-३२७८६

        Ramji Yadav जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें और अभिज्ञान तथा अभिजीत को धन्यवाद !

        Ajit Wadnerkar : वाह…आपकी खुशी में हमें भी शामिल समझिए…हाँ, आपकी लाइब्रेरी का प्रसाद हम न पा सके इसका अफ़सोस है । अनितादी ने बताया था उसके बारे में । आपको तो पुण्य मिल गया ।

        Nandini Atmasiddha : अभिनंदन सूरज प्रकाशजी। और यह उपहार बहुतही उपयुक्त है। आपको किताबोंकी दुनिया से सहज जुड़ा रखने के लिए।

        Subhash Neerav : बड़े भाई सूरज प्रकास जी, आपको बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं ! यह तोहफ़ा तो कमाल का है…

        Tara Meena : युग बदल रहा है किताबे पिडिफ में आ रही है जिससे ज्यादा से ज्यादा पाठकगण पढ़ सकेगे ,,,,,,,, ,, , नए फोन के लिए आपको बंधाई

        Kavi Ram Kumar Verma : होनहार पिता के होनहार बेटे |

        Naresh Bohra : बधाई और शुभकामना दीर्घ और स्वस्थ जीवन के लिए…..

        Arbind Kumar Thakur : सर, इस खबर से बडी प्रसनन्‍ता हुई । सुन्‍दर सोच और अनुकरणीय कार्य करने वालो पर ईश्‍वर की कृपादृष्टि रहती ही है । पुत्रों से प्राप्‍त यह अनुपम उपहार आप के लिए साहित्‍य का विशाल फलक तो उपलब्‍ध करायेगा ही, उनकी पितृभक्ति का कोमल अहसास भी कराता रहेगा । आपको उपहार बहुत-बहुत मुबारक हो । आपके द्वारा प्रदतत पुस्‍तकों का उपयोग कई पुस्‍तक प्रेमियों द्वारा किया जाने लगा है ।

        Neeraj Goswamy : Badhai…Badhai…Badhai…साठ के हो गए लेकिन मिठाई एक बार भी नहीं खिलाई…सठियाने पर भी बधाई स्वीकारें…बेटे ऐसे ही होने चाहियें…उन्होंने आपको बैलगाड़ी से हवाई जहाज़ में बिठा दिया है…अब खूब उडो मियां…जल्द ही मिलते हैं.

        Kishore Diwase : सूरज प्रकाश जी… अत्यंत अद्भुत एवं अनुकरणीय.उपहार… आपको नमन… और बच्चो को आपके अच्छे संस्कार मिलने पर सफल जीवन की शुभकामनायें.

        Ratna Verma : जन्म दिवस पर आपको हर्दिक शुभकामनाएँ। आप ऐसे अनमोल उपहार के हकदार भी हैं।

        Vijay Gaur : दाढ़ी का भी पीडीएफ़ बना कर रख लीजिये इसमें। क्योंकि भविष्य में काली होने लगेगी और मुझे तो तब भी उसे और और सफ़ेद देखने की इच्छा रहेगी। साठ साल के युवा को बहुत बहुत बधाई।

        Shyam Bihari Shyamal : वाह… सौभाग्‍य है यह पाना… ज्ञान का पूरा ख़जाना…

        Chanchal Bhu : सूरज भाई ! अब जो किताबे आपसे खलिया जाय तो हम लोग एक पुस्तकालय गाँव में चला रहे हैं .इसे भी याद रखियेगा …

        Kalanath Mishra : आदरणीय सूर्य प्रकाश जी, आप तो सतत ही आधुनिक तकनीक का प्रयोग करने में माहिर रहे हैं. हिन्दी को आपके इस हुनर का अवश्य लाभ होगा.

सूरज प्रकाश के फेसबुक वॉल से साभार…

 

 
 

 
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