बिहार के कटिहार जिले की जिलाधिकारी अश्वनी ने एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए दो न्यूज चैनलों को बयान ना देने का लिखित फरमान अपने अफसरों को जारी किया है. यह पत्र कटिहार के सभी अधीनस्थ अधिकारियों के पास पहुंच चुका है. इसमें साफ साफ लिखा है कि महुआ न्यूज और इंडिया न्यूज के संवाददाताओं से कोई भी जिले का अधिकारी बात नहीं करेगा. बताया जाता है कि मैट्रिक की परीक्षा में कटिहार में धड़ल्ले से नकली प्रश्नपत्र बिक रहे थे, और इससे संबंधित खबर को सभी चैनल ने प्रमुखता से दिखाया.
सबने यह दिखाया कि नकली प्रश्न पत्र रात भर बिकते रहे और जिला प्रशासन के लोग सोते रहे, नतीजन कई लोग ठगे गए. इस खबर में जिले के शिक्षा पदाधिकारी का बयान भी दिखाया गया. इस फरमान को देखकर लोगों को फिर जस्टिस काटजू के उस बयान की याद आने लगी है कि क्या बिहार में मीडिया स्वतंत्र है? डीएम के फरमान का विरोध सत्ताधारी पक्ष के लोग करने लगे हैं. बीजेपी के एमएलसी राजवंशी सिह ने कहा है कि मीडिया से बात न करने से संबंधित आदेश जारी करना गलत है और वह इस मसले को बिहार के मुख्यमंत्री तक ले जाएंगे. विपक्षी पार्टी लोजपा के प्रदेश महासचिव समरेन्द्र कुनाल ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए 17 मार्च को धरना देने का ऐलान किया है. तुगलकी फरमान आप भी पढ़ें…






