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‘माया’ युग के वसूली माफिया का दावा अखिलेश्‍ा को दिए सैकड़ों करोड़

: क्या अखिलेश यादव इन चुनौतियों को अवसर के रूप में बदल पायेंगे? : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव ने शपथ ले ली है. उन्हें यह पद एक सही लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बाद मिला है. पूरे राज्य में चार मुख्य पार्टियों ने चुनाव लड़ा, धुआंधार प्रचार हुआ, सबने एक दूसरे के खिलाफ बातें कीं और जब नतीजा आया तो सभी पार्टियों ने चुनाव नतीजों को स्वीकार किया. उनके सामने कोई विकल्प भी नहीं था लेकिन कभी कभार देखा गया है कि चुनाव के बाद तल्खी रह जाती है. खुशी की बात यह है कि इस बार ऐसी कोई तल्खी नहीं थी.

: क्या अखिलेश यादव इन चुनौतियों को अवसर के रूप में बदल पायेंगे? : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव ने शपथ ले ली है. उन्हें यह पद एक सही लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बाद मिला है. पूरे राज्य में चार मुख्य पार्टियों ने चुनाव लड़ा, धुआंधार प्रचार हुआ, सबने एक दूसरे के खिलाफ बातें कीं और जब नतीजा आया तो सभी पार्टियों ने चुनाव नतीजों को स्वीकार किया. उनके सामने कोई विकल्प भी नहीं था लेकिन कभी कभार देखा गया है कि चुनाव के बाद तल्खी रह जाती है. खुशी की बात यह है कि इस बार ऐसी कोई तल्खी नहीं थी.

अब तक के संकेतों से लगता है कि अखिलेश यादव एक गंभीर मुख्यमंत्री होंगे. एक राजनीतिक प्रचारक के रूप में अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के अभियान की अगुवाई की और उसमें वे एक सफल राजनेता के रूप में पहचाने गए हैं. लेकिन क्या वे आने वाली लड़ाइयों में भी सफल होंगे, यह देखना बहुत ही दिलचस्प होगा. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का काम बहुत ही मुश्किल है. सबसे बड़ा तो यही कि पिछली सरकार ने अपना पांच साल पूरा किया और उसके राज की जो सबसे बड़ी बात राज्य के अंदर और राज्य के बाहर मालूम है, वह यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री के बहुत करीबी लोगों ने नोयडा और ग्रेटर नोयडा के कुछ लोगों को अपना एजेंट बना रखा था और वे यहाँ पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर अरबों रुपये की वसूली करते थे.

बताते हैं कि नोयडा और ग्रेटर नोयडा में ज़मीन के हर इंच की बिक्री में इन लोगों ने मुख्यमंत्री या उनके भाई के नाम पर उगाही की. पिछले एक हफ्ते से दिल्ली के आसपास के इलाकों में चर्चा है कि जिन लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के यहाँ वसूली का तंत्र बना रखा था, उन्होंने किसी बिल्डर की मार्फ़त अखिलेश यादव के यहाँ भी अपनी पहुंच बना ली है और कुछ सौ करोड़ रुपये अखिलेश यादव के यहाँ पहुंचा दिया है. अखिलेश यादव का मुख्यमंत्री के रूप में सबसे बड़ा काम होना चाहिए कि इस तरह के लोगों के बारे में पता करें और उनको ऐसी सज़ा दें कि आने वाले पांच वर्षों में किसी की हिम्मत न पड़े कि वह मुख्यमंत्री के नाम पर वसूली का काम शुरू कर सके. क्योंकि अब तक के उनके राजनीतिक आचरण से साफ़ लगता है कि वे एक आधुनिक राजनेता हैं और वे किसी भी तरह के धंधेबाज़ के हाथों में इस्तेमाल नहीं हो सकेंगे.

नए मुख्यमंत्री ने साफ़ कहा है कि उनकी सरकार बदले की भावना से काम नहीं करेगी लेकिन उन्हें यह तो सुनिश्चित करना ही होगा कि उनके नाम पर कोई भी व्यक्ति किसी तरह का धंधा न कर सके. ख़ास तौर पर कोई भी ऐसा आदमी जिसने पिछली सरकार के दौरान लूटमार मचा रखी थी, उसे दूर रखना उनके हित में होगा. अगर एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें अपनी छवि स्थापित करनी है तो उन्हें यह बात सुनिश्चित करनी पड़ेगी कि वे उन लोगों से दूर रहें, जिन्होंने पिछली सरकार को एक उगाही की सरकार के रूप में पहचान दिलाई थी. इन लोगों को सज़ा देना बिलकुल आसान होगा क्योंकि यह सभी सरकारी कर्मचारी हैं. इन लोगों के बारे में पता लगाना किसी भी मुख्यमंत्री के लिए बहुत ही आसान होगा. लेकिन उनकी सरकार  के कामकाज को देखने के लिए इस बार उनके चुनावी घोषणा पत्र को देखा जाएगा.

समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र को इस बार राज्य की जनता ने बहुत ही गंभीरता से लिया है. उस में जो भी वायदे किये गए हैं उनको पूरा करना नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. इस बार नौजवानों और महिलाओं ने समाजवादी पार्टी को झूम कर वोट दिया है. उनके बारे में जो वायदे किये गए हैं उन्हें हर हाल में लागू करना होगा. और अगर अपने घोषणा पत्र में किये गए वायदों को लागू करने की दिशा में मुख्यमंत्री ने सही क़दम उठा लिया तो आने वाले वर्षों में वे एक ऐसे राजनेता के रूप में पहचाने जायेंगे जिसका कोई जोड़ नहीं रहेगा. समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र में कहा गया है कि किसानों को मुफ्त पानी दिया जाएगा, खेती के लिए और शहरी इलाकों में बिजली हर हाल में उपलब्ध कराई जायेगी और बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जायेगा. अगर उन्हें रोजगार नहीं दिया जा सका तो जब तक वे काम नहीं पा जाते, उन्हें बेरोजगारी भत्ते के रूप में हर महीने एक हज़ार रुपया दिया जायेगा. यह बहुत बड़ी बात है.

समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव की इस बात पर राज्य के नौजवानों ने विश्वास किया और उनको बड़ी संख्या में वोट दिया. इस विश्वास का कारण यह है कि पिछली बार जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने बेरोजगारी भत्ता देना शुरू कर दिया था. उनपर विश्वास किया गया इसीलिये जब से चुनाव का काम पूरा हुआ है तभी से बुन्देलखंड, मध्य उत्तर प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हर जिला रोज़गार कार्यालय में नाम लिखाने के लिए नौजवानों की कतारें लगी हुई हैं. इन नौजवानों की उम्मीद को पूरा करना मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए अपने पिछले कार्यकाल में मुलायम सिंह यादव ने लडकियोंको बहुत महत्व दिया था. बच्चियों के लिए उन्होंने कन्या विद्याधन की व्यवस्था थी. उनकी इस बात को राज्य के ग्रामीण इलाकों में बहुत सराहा गया था और इस चुनाव में बूथों पर माहिलाओं की जो लंबी लम्बी कतारें लगी थीं, वह उन महिलाओं की थीं जो मानती हैं कि मुलायम सिंह यादव बात के धनी नेता हैं. उनकी उम्मीदों पर भी समाजवादी पार्टी को खरा उतरना होगा.

इन दोनों ही स्कीमों में पिछली बार बिचौलियों ने खूब दलाली खाई थी, विधायकों ने भी जम कर लूटा था, इस बार स्पष्ट बहुमत से आई सरकार के लिए बेईमान विधायकों या उनके एजेंटों की मनमानी रोकना बहुत आसान होगा. अगर यह योजनायें और इनका लाभ आम आदमी तक पहुंच गया तो सही मायनों में एक वेलफेयर स्टेट की स्थापना हो जायेगी. आखिलेश यादव का रिकार्ड बेदाग़ है और मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में उन्होंने कभी भी सत्ता का दुरुपयोग नहीं किया है इसलिए लगता है कि वे सत्ता को आम आदमी के हित के लिए इस्तेमाल ज़रूर करेंगे. समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र में शिक्षित लड़के-लड़कियों के लिए लैपटाप और टैबलेट का वायदा किया गया है. बहुत बड़ा राज्य है और इस तरह के लैपटाप और टैबलेट को खरीदने के लिए बहुत बड़ी रक़म की ज़रुरत भी पड़ेगी. शहरी बाबू और बुद्धिजीवी टाइप पत्रकार कहने लगे हैं कि इतनी बड़ी रक़म का इंतजाम कर पाना बहुत मुश्किल होगा. लेकिन उन्हें मालूम नहीं कि अगर सरकार तय कर ले तो कुछ भी असंभव नहीं होता. जो सरकार एक मामूली फैसले से पूंजीपतियों को लाखों-करोड़ों रुपये के टैक्स की छूट दे सकती है, वह अपने राज्य के नौजवानों की शिक्षा के लिए ज़रूरी लैपटाप का इंतज़ाम भी कर सकती है. 

पिछले पांच वर्षों में इसी उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों और मुख्यमंत्री की कृपा से नोयडा और ग्रेटर नोयडा में कई हज़ार करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में खाए गए हैं. नए मुख्यमंत्री ने अगर दिल्ली से लगे इलाकों में ज़मीन की बिक्री में होने वाले सरकारी धन की लूट पर लगाम लगाने में सफलता हासिल कर ली तो नौजवानों के कल्याण के लिए खर्च होने वाली रक़म का इंतज़ाम बहुत ही आसानी से किया जा सकेगा. वैसे भी नीतीश कुमार ने एक नया रास्ता खोल दिया है. अफसरों की घूस की कमाई को वे ज़ब्त कर लेते हैं. अगर अखिलेश यादव ने अफसरों की घूस की कमाई को ज़ब्त करने का काम शुरू कर दिया तो राज्य में धन की कमी नहीं रह जायेगी.

इस बार समाजवादी पार्टी को मुसलमानों ने लगभग एकतरफा वोट किया है. यह भी सच है कि पिछले बीस वर्षों से मुसलमान हर चुनाव में मुलायम सिंह यादव के साथ खड़े रहते हैं. अब तक मुसलमानों ने जब भी समाजवादी पार्टी को वोट दिया तो उनके मन में यह उम्मीद रहती रही है कि उन्हें राज्य में शान्ति से रहने का मौक़ा मिलेगा और वे अपना काम कर सकेंगे. राज्य में पिछली सदी में इतने दंगे हुए हैं कि मुसलमान के लिए दंगे से बच पाना ही सबसे बड़ी मदद हुआ करती थी. लेकिन अब माहौल बदल गया है. अब किसी भी जमात के लिए दंगे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर पाना बहुत मुश्किल होगा. इसके कई कारण हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि मीडिया अब बहुत ही चौकन्ना रहता है. कहीं भी कोई भी बात होती है, वह फ़ौरन टेलीविज़न के ज़रिये पूरी दुनिया को पता लग जाती है.

ज़ाहिर है कोई भी नेता यह नहीं चाहेगा कि वह दंगा करवाए और उसका नुकसान उठाये. वैसे भी हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच दंगा कराने वाली जमातों की औकात घटी है. इसलिए दंगे से बचना मुसलमान के लिए कोई बहुत बड़ी बात नहीं है, वह अपने आप बच जाता है. इस बार मुसलमान नई सरकार की तरफ इस उम्मीद से आया है कि उसकी सामाजिक तरक्की होगी. उसे सरकार में भागीदारी का मौक़ा मिलेगा. पिछली बार जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे तो सरकारी नौकरियों में बड़ी संख्या में मुसलमानों को भर्ती किया गया था. इस बार भी मुसलमानों को उम्मीद है कि सरकारी नौकरियों में उनकी संख्या के हिसाब से अवसर मिलेंगे.

मुसलमानों के बीच शिक्षा की बहुत कमी है. इसके चलते भी गरीबी बहुत है. नई सरकार को उनकी शिक्षा के लिए बड़े पैमाने पर काम करना पडे़गा हालांकि यह काम सबसे आसान है. केंद्र सरकार ने मुसलमानों के लिए मौलाना आज़ाद फाउडेशन नाम के संस्था के ज़रिये हर मुस्लिम बच्चे के लिए वजीफे की व्यवस्था कर रखी है. हर मुस्लिम बच्चा जो स्कूल जाता है या ऊंचे दर्जों की पढ़ाई करता है इस वजीफे का हक़दार है. दक्षिण भारत के सभी राज्यों और महारष्ट्र में बहुत बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. लेकिन उत्तर भारत में यह योजना उतनी सफल नहीं है. राज्य सरकार को चाहिए कि हर इलाके में बहुत सारे सेकुलर लोगों को उत्साहित करके इस काम में लगा दे. अगर गरीब मुसलमानों के परिवारों में वजीफे के रूप में हर महीने कुछ हज़ार रुपये आने लगेंगे तो मुसलमानों के बच्चे भारी संख्या में शिक्षा हासिल कर लेंगे और फिर उनकी तरक्की को कोई नहीं रोक पायेगा. इसके अलावा राज्य सरकार के जिन प्राइमरी स्कूलों की पूरी तरह से दुर्दशा हुई पड़ी है, उसको भी ठीक किया जा सकता है. अगर शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक पहल करने में अखिलेश यादव की सरकार कामयाब हो गयी तो वे मुख्यमंत्री के रूप में राज्य का मुस्तकबिल चमकदार बना देंगे.

लेखक शेष नारायण सिंह वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. कई मीडिया संस्‍थानों में वरिष्‍ठ पदों पर रहे हैं. इन दिनों जनसंदेश टाइम्‍स के साथ रोविंग एडिटर के रुप में कार्यरत हैं.

 

 
 

 
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