Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

उत्‍तराखंड पर एक और बाहरी नेता थोपने की साजिश

''गरीब की जोरू सबकी भाभी'' वाला मुहावरा बेचारे गरीब व असहाय उत्तराखंड के लिए सटीक बैठ रहा है. अब देखिये उत्तराखंड से राज्य सभा के लिए एक सीट खाली हो रही है. उत्तराखंड कोटे से मध्य प्रदेश के कांग्रेसी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. अब उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए नया सांसद चुना जाना है पर इसके लिए कांग्रेस व भाजपा को पूरे उत्तराखंड में कोई नेता नहीं मिल पा रहा है. कांग्रेस मध्य प्रदेश के सुरेश पचौरी को उत्तराखंड से राज्यसभा में भेजने का मन बना चुकी है. तो कांग्रेस में आपसी सिर फुटौव्‍वल को देखते हुए भाजपा अपने पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीता रमैया तथा राजस्थान के उद्योगपति कमल मोरारका को मैदान में उत्तारने की योजना बना रही है.

''गरीब की जोरू सबकी भाभी'' वाला मुहावरा बेचारे गरीब व असहाय उत्तराखंड के लिए सटीक बैठ रहा है. अब देखिये उत्तराखंड से राज्य सभा के लिए एक सीट खाली हो रही है. उत्तराखंड कोटे से मध्य प्रदेश के कांग्रेसी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. अब उत्तराखंड से राज्यसभा के लिए नया सांसद चुना जाना है पर इसके लिए कांग्रेस व भाजपा को पूरे उत्तराखंड में कोई नेता नहीं मिल पा रहा है. कांग्रेस मध्य प्रदेश के सुरेश पचौरी को उत्तराखंड से राज्यसभा में भेजने का मन बना चुकी है. तो कांग्रेस में आपसी सिर फुटौव्‍वल को देखते हुए भाजपा अपने पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीता रमैया तथा राजस्थान के उद्योगपति कमल मोरारका को मैदान में उत्तारने की योजना बना रही है.

पर इस समय राज्य सभा के लिए सांसद जिताने की चाभी चार निर्दलीयों व तीन बसपा समेत सात विधायकों के हाथ में है. इसलिए वे चाहें तो दोनों दलों के सामने उत्तराखंड के प्रत्याशी होने का दावा मजबूती से रख सकते हैं. कितनी बिडम्बना है कि दिल्ली के नेता उत्तराखंड को एक चारागाह समझते है. उत्तराखंड कोटे से बाहर के सांसदों ने करोड़ों की सांसद निधि का क्या किया इसके आंकड़े जुटाए जाएँ तो आम आदमी को सांप सूंघ जाएगा क्योंकि निधि का करोड़ों रुपया पहाड़ के गरीब के काम नहीं बल्कि दलालों की भेंट चढ़ गया. इस समय मौक़ा है कि उत्तराखंड के ये सात विधायक दोनों दलों के सामने यह शर्त रखें कि उसी को वोट मिलेगा, जिसका प्रत्याशी उत्तराखंड का मूल निवासी होगा. विधायकों के पास उत्तराखंड के आम आदमी का दिल जीतने का यह सुनहरा मौक़ा है.

उत्तराखंड का कोई आरटीआई कार्यकर्ता यदि 10 साल में बाहर से बने उत्तराखंड के राज्यसभा सांसदों की निधि का लेखा जोखा मांगें तो दोनों दलों के हाईकमान के साथ-साथ इन सांसदों की पोल खुल सकती है. इन दिनों दिल्ली में ऐसे राजनीतिक एवं पत्रकारिता से जुड़े सत्ता के दलालों की फ़ौज विजय बहुगुणा व हरीश रावत के इर्दगिर्द मंडरा रहे हैं तथा दोनों को ही मुख्यमंत्री बनाने की जोड़तोड़ में अपनी भूमिका का बखान कर रहे हैं. उन्हें पता है कि दोनों ही खेमे इस समय किसी भी झाड़-फूंक पर विश्वास कर रहे हैं. बीमारू राज्य कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में जहां बेरोजगारी भत्ता तथा बच्चों को लेपटॉप देने वाली योजना पर अमल का निर्णय ले लिया गया है, वहीं पर भोले-भाले उत्तराखंडियों के लिए कांग्रेस ने राज्‍य को अराजकता का अखाड़ा  बना रखा है. कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने तो इस पर जातिवादी लाइन तक ले ली है जो उत्तराखंड के लिए किसी कलंक से कम नहीं है.

लेखक विजेंद्र रावत उत्‍तराखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

 

 
 

 
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...