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लखनऊ में पहली गाज मुस्लिम अफसर पर!

: बीस साल बाद हुई थी किसी मुस्लिम अफसर की तैनाती : मुसलमानों में नाराजगी :  सरकार बनने से पहले और सरकार बनाने के बाद मुस्लिमों के लिए समाजवादी पार्टी कितने ही दावे करे मगर हकीकत कहीं जुदा नजर आ रही है. एक ओर जहाँ आजम खान को गृह मंत्रालय देने में आनाकानी की जा रही है, वहीं लखनऊ में तबादले की पहली गाज एक मुस्लिम अफसर पर ही गिराने की तैयारी हो रही है. लखनऊ के आईजी जावेद अख्तर को हटाने तथा उनकी जगह सुभाष चन्द्र को लखनऊ का आईजी बनाने की तैयारी हो रही है.

: बीस साल बाद हुई थी किसी मुस्लिम अफसर की तैनाती : मुसलमानों में नाराजगी :  सरकार बनने से पहले और सरकार बनाने के बाद मुस्लिमों के लिए समाजवादी पार्टी कितने ही दावे करे मगर हकीकत कहीं जुदा नजर आ रही है. एक ओर जहाँ आजम खान को गृह मंत्रालय देने में आनाकानी की जा रही है, वहीं लखनऊ में तबादले की पहली गाज एक मुस्लिम अफसर पर ही गिराने की तैयारी हो रही है. लखनऊ के आईजी जावेद अख्तर को हटाने तथा उनकी जगह सुभाष चन्द्र को लखनऊ का आईजी बनाने की तैयारी हो रही है.

सुभाष चन्द्र की खासियत यह है कि वह आईएएस अनीता सिंह के पति हैं. अनीता सिंह सपा मुखिया के सबसे करीबी अफसरों में एक हैं. मगर उनकी खातिर लखनऊ में तैनात इकलौते मुस्लिम अफसर को हटाना किसी के गले नहीं उतर रहा. मुस्लिमों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि लगभग बीस साल बाद किसी मुस्लिम अफसर को लखनऊ के प्रमुख प्रशासनिक पद पर तैनात किया गया था. माना जा रहा था कि अखिलेश सत्ता सम्हालने के बाद कुछ और मुस्लिम अफसर को तैनात करेंगे. मगर हुआ इसका उल्टा.

दरसअल मुस्लिम समाज में इस बात को लेकर बेहद नाराजगी थी कि लखनऊ में पिछले बीस सालों से कोई भी डीएम, एसपी, डीआईजी, आईजी या कमिश्नर मुस्लिम तैनात नहीं किया गया. मायावती जब मुस्लिमों के आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही थी तो यह मुद्दा भी कुछ प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने उठाया. उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि आखिर इन पदों पर तैनाती को लेकर मुस्लिमों से भेदभाव क्यों बरता जा रहा है. चूँकि यह नाजुक मामला था लिहाजा किसी काबिल और ईमानदार मुस्लिम अफसर की तलाश शुरू हुई. इसके बाद आईजी के रूप में जावेद अख्तर की तैनाती हो गई. मुस्लिमों के लिए यह तैनाती इसलिए भी अहम थी क्योंकि लगभग बीस साल बाद किसी महत्वपूर्ण पद पर यह तैनाती हुई थी.

इसके बाद प्रदेश में निजाम बदला. माना जा रहा था कि जिस तरह मुस्लिमों ने खुल कर सपा का साथ दिया उससे यह तय है कि अखिलेश मुस्लिमों के हित में काम करेंगे. सरकार बनने के बाद सपा मुखिया ने कहा भी कि सौ फ़ीसदी मुस्लिमों ने सपा को वोट दिया. मगर इसके बाद अनीता सिंह का जलवा शुरू हुआ. उन्होंने पद सम्हालते ही कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह का कमरा कब्जाया. इस घटना से वरिष्‍ठ आईएएस बेहद नाराज हो गए. उनका मानना था कि जब सचिव हो कर ही वह सबसे बड़े कमरे में बैठेंगी तो प्रमुख सचिव कहाँ बैठेंगे? जब इस पर बहुत हल्ला मचा तो अनीता सिंह ने अपना कमरा खाली करके बराबर में छोटा कमरा लिया. इसके बाद फिर अनीता सिंह ने अपना जलवा दिखाने की तैयारी शुरू की. उन्होंने कहा कि उनके पति को लखनऊ का आईजी बनाया जाये. चूंकि आदेश अनीता सिंह का है तो किसी को टालने की हिम्मत नहीं हो रही.

माना जा रहा है कि कुछ घंटों के भीतर ही अनीता सिंह के पति की ताजपोशी कर दी जाएगी. कुछ टीवी चैनल में तो यह तैनाती आना भी शुरू हो गई. मगर इस घटना से मुस्लिमों में बेहद नाराजगी है. इन लोगों का कहना है कि बीस सालों बाद एक मुस्लिम अफसर तैनात किया गया था. मगर अनीता सिंह के प्रभाव में उसे भी हटाया जा रहा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुस्लिम समुदाय का प्रभाव काम करता है या फिर अनीता सिंह का जलवा.. मगर इन हालातों से यह तय है कि अखिलेश के दरबार में भी अनीता सिंह के रूप में एक और नवनीत सहगल की तैयारी हो रही है.

 

 
 

 
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