जाने माने जज रहे और इन दिनों प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के चेयरमैन के रूप में कार्यरत जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने एक कार्यक्रम में स्ट्रिंगरों के शोषण और तनख्वाह न दिए जाने के मुद्दे को गंभीर बताते हुए इस पर सार्थक कदम उठाने की बात कही. जस्टिस काटजू वरिष्ठ पत्रकार शैलेश और डा. ब्रजमोहन द्वारा लिखित किताब 'स्मार्ट रिपोर्टर' के विमोचन के मौके पर पत्रकारों से रूबरू थे.
दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कांफ्रेंस हाल में आयोजित कार्यक्रम में भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने टीवी के कई संपादकों की मौजूदगी में जस्टिस काटजू से सवाल किया कि एक तरफ टीवी के दिल्ली नोएडा में बैठे संपादक हर महीने लाखों रुपये तनख्वाह के रूप में पाते हैं वहीं दूसरी तरफ देश भर में फैले हजारों स्ट्रिंगरों को ये लोग फूटी कौड़ी भी नहीं देते, जिसके कारण स्ट्रिंगर जिले जिले में ब्लैकमेलिंग के जरिए जीवन यापन को मजबूर है या फिर पत्रकारिता छोड़कर कुछ और धंधा करने के लिए मजबूर हैं, क्या शोषण की इस अंतकहानी पर लगाम लगेगी, क्या स्ट्रिंगरों को जीवन यापन के लिए न्यूज चैनल न्यूनतम फिक्स वेतनमान देंगे, क्या इस मसले पर प्रेस काउंसिल कोई पहल करेगा, क्या जस्टिस काटजू कोई कदम उठाएंगे?


यशवंत के इस सवाल का जवाब जस्टिस काटजू ने दिया. मीडियाकर्मियों से खचाखच भरे आईआईसी के कांफ्रेंस हाल में जस्टिस काटजू ने कहा कि उनके पास स्ट्रिंगरों के शोषण से संबंधित कई शिकायतें आई हैं और आती रहती हैं, स्ट्रिंगरों को शोषण से बचाने के लिए उन्हें न्यूनतम फिक्स्ड वेतनमान दिए जाने की वाकई जरूरत है. अगर हम पत्रकारों की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं करेंगे तो उनसे हम किस तरह निष्पक्ष पत्रकारिता की उम्मीद करेंगे. यह बड़ा मुद्दा है और संवेदनशील मसला है. इस पर जरूर ध्यान दिया जाएगा. जस्टिस काटजू के इस वक्तव्य का तालियों के जरिए स्वागत किया गया. उल्लेखनीय है कि स्ट्रिंगरों के शोषण के मसले को भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के समक्ष भी उठा चुके हैं, उस वक्त भी कई संपादक सोनी के साथ मंचासीन थे. उस वक्त अंबिका सोनी ने क्या कहा, उसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सुन सकते हैं- स्ट्रिंगर मुद्दे पर अंबिका वचन





