: इस महीने देर से मिली कर्मचारियों को सेलरी : अखबार के पन्ने भी हुए कम : लखनऊ समेत गोरखपुर, बनारस और कानपुर से प्रकाशित हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स का संकट गहराने लगा है. कुशवाहाजी के सीबीआई के चंगुल में जाने के बाद अखबार संचालन में आर्थिक कठिनाइयां भी आने लगी हैं. इस महीने लखनऊ के लोगों की सेलरी देर से आई है. पहले लखनऊ एडिशन के सारे 20 पेज रंगीन होते थे, परन्तु आर्थिक दुश्वारियों ने इसे 16 पेज करने पर मजबूर कर दिया. रंगीन पन्नों की संख्या भी घटा दी गई. अब खबर है कि अखबार के 14 पन्ने ही प्रकाशित हो रहे हैं.
सूत्र बताते हैं कि साहित्य से जुड़ जिन पेजों को हरे प्रकाश अकेले बनाते थे, उसके लिए प्रबंधन ने चार-पांच सहायक संपादक रखे फिर भी वो ये पेज संभाल नहीं पा रहे हैं. बहुरंग के नाम पर इंटरनेटी माल का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है. बाबू लाल कुशवाहा की लंबी जुदाई को देखते हुए संकट और बढ़ने के आसार दिख रहे हैं. इसकी शुरुआत भी वेतन के देरी से आने के साथ हो चुकी है. अखबार के कैशियर तथा एमडी से भी सीबीआई कई बार पूछताछ कर चुकी है कि इस अखबार के तार किस तरीके से कुशवाहा के साथ जुड़े हुए हैं.
कहा जा रहा है जिस तरह अब तक कर्मचारियों को कैश में वेतन दिया जा रहा था, वह प्रबंधन के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. कठिनाई बढ़ने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अखबार को अपने पन्ने घटाने पड़े हैं. 14 पन्ने में अखबार प्रकाशित हो रहा है. 18 मार्च को तो जिलों, गोरखपुर के कुछ हिस्सों तथा कानपुर में अखबार बंटा ही नहीं. बताया जा रहा है कि अखबार छप ही नहीं पाया था. इसका कारण मशीन में गड़बड़ी को बताया गया. सिटी में दूसरे जगह से अखबार छपवा कर किसी तरह बंटवाया गया. वैसे दूसरी तरफ यह बातें भी सामने आईं कि कागज नहीं होने के चलते भी अखबार छपने में दिक्कत आ रही है.





