मुकेश कुमार एक जमाने में उस टीम में भी थे, जिसके कंधों पर वायस आफ इंडिया को लांच करने और जमाने की जिम्मेदारी थी. रामकृपाल सिंह समेत कई लोग वीओआई से जुड़े थे. पर वीओआई नहीं चला. बहुत बवाल हुए. बहुत सारी चीजें हुईं. मुकेश कुमार को भी वहां से इस्तीफा देना पड़ा था क्योंकि उन्हें अपनी टीम के लोगों से पेड न्यूज कराने को कहा गया और मुकेश ने ऐसा करने से इनकार करते हुए इस्तीफा दे दिया था. वीओआई के बहुत लोग बेरोजगार हुए. जितने लोग वीओआई से जुड़े थे, वे ज्यादातर अच्छे चैनलों से आए थे. वीओआई के पतित होने और बंद होने से मार्केट रेट हर पत्रकार का डाउन हुआ. ब्रांड इमेज सबकी गिरी.
मुकेश कुमार भाग्यशाली थे. वे वीओआई से हटे तो कुछ महीने बाद उनकी बातचीत प्रकाश झा से हुई और प्रोजेक्ट फाइनल हो गया. वे मौर्य टीवी से जुड़ गए. इसके सर्वेसर्वा बने और चैनल लांच कराया. यह चैनल बिहार का नंबर वन चैनल बन गया. तब मुकेश ने इस्तीफा देकर न्यूज एक्सप्रेस का प्रोजेक्ट लिया. मौर्य टीवी बिहार झारखंड का रीजनल चैनल था इसलिए वह पटना बेस्ड था. न्यूज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल है इसलिए वह नोएडा बेस्ड है. न्यूज एक्सप्रेस के माध्यम से मुकेश ने वीओआई के ढेर सारे लोगों को फिर से मेनस्ट्रीम से जोड़ा.
सबके कंधे पर बड़ी चुनौती थी. न्यूज एक्सप्रेस का हाल वीओआई जैसा नहीं होने देना था, इसलिए सबने एकजुट होकर मेहनत की. आखिर कैसे न्यूज एक्सप्रेस को मुकेश कुमार जमा पाए और इसे देखते ही देखते सीरियस चैनलों की लिस्ट में शामिल करा ले गए. तकनीक, प्रजेंटेशन, कंटेंट, प्रोग्रामिंग हर क्षेत्र में न्यूज एक्सप्रेस ने अलग छाप छोड़ी है. यह सब कैसे संभव हुआ. इसको लेकर भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह ने न्यूज एक्सप्रेस के हेड मुकेश कुमार से बातचीत की. यह बातचीत वीडियो फार्मेट में है. करीब बारह मिनट की इस बातचीत को देखने सुनने के लिए नीचे क्लिक करें…







