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शोभना भरतिया और शशि शेखर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करो

: भागलपुर में दैनिक हिन्दुस्तान प्रकाशन को प्रथम दृष्टया अवैध पाने के बाद न्यायालय ने सुनाया फैसला : मुंगेर : बिहार के मुंगेर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा ने 5 नवंबर की शाम परिवार-पत्र संख्या-993 सी (2011) में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए द हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (एचएमवीएल) की अध्यक्ष शोभना भरतिया (नई दिल्ली), प्रकाशक अमित चोपड़ा, दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक (नई दिल्ली) शशि शेखर, दैनिक हिन्दुस्तान (पटना) के कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव, दैनिक हिन्दुस्तान (भागलपुर संस्करण) के उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु और मुद्रक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 471 और 476 व प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8बी., 14 और 15 के तहत मुंगेर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।

: भागलपुर में दैनिक हिन्दुस्तान प्रकाशन को प्रथम दृष्टया अवैध पाने के बाद न्यायालय ने सुनाया फैसला : मुंगेर : बिहार के मुंगेर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा ने 5 नवंबर की शाम परिवार-पत्र संख्या-993 सी (2011) में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए द हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड (एचएमवीएल) की अध्यक्ष शोभना भरतिया (नई दिल्ली), प्रकाशक अमित चोपड़ा, दैनिक हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक (नई दिल्ली) शशि शेखर, दैनिक हिन्दुस्तान (पटना) के कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव, दैनिक हिन्दुस्तान (भागलपुर संस्करण) के उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु और मुद्रक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 471 और 476 व प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8बी., 14 और 15 के तहत मुंगेर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया।

मुंगेर के सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा की अदालत में 18 अक्ततूवर, 2011 को द हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष शोभना भरतिया, हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर, पटना संस्करण हिन्दुस्तान के स्थानीय संपादक अकु श्रीवास्तव और हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण के उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 471 और 474 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8 बी., 14 और 15 के तहत परिवार-पत्र दायर किया था। इस मुकदमे में वादी मंटू शर्मा की ओर से मुंगेर के वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार-द्वितीय ने बहस की। बहस में सहयोग वरीय अधिवक्ता काशी प्रसाद, अजय तारा और बिपिन मंडल ने किया। परिवाद-पत्र में वादी मंटू शर्मा ने आरोप लगाया था कि सभी अभियुक्तगण देश के बड़े मीडिया हाउस मेसर्स हिन्दुस्तन टाइम्स लिमिटेड, जो बाद में बदलकर मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड किया गया है, के संपादकीय बोर्ड और प्रबंधन के अधिकारी हैं। यह कंपनी देश के विभिन्न भागों में हिन्दी में दैनिक हिन्दुस्तान शीर्षक से समाचार पत्र को प्रकाशित कर रही है।

परिवाद-पत्र में आगे वादी शर्मा ने आरोप लगाया है कि किसी भी समाचार पत्र के प्रकाशन के पूर्व प्रकाशक को प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रदत्त प्रावधानों का पालन कानूनी बाध्यता है और इन कानूनी बाध्यता का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। वादी ने परिवाद-पत्र में आगे आरोप लगाया है कि अभियुक्त नंबर-एक शोभना भरतिया देश के विभिन्न स्थानों से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन कर रही है और विधिवत कार्यालय का संचालन कर रही है। जिन-जिन नगरों में दैनिक हिन्दुस्तान का नगर संस्करण प्रकाशित होता है, वहां के लिए स्थानीय संपादक नियुक्त रहते हैं जो प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5(1) के अन्तर्गत है। अभियुक्त गण अपने समाचार पत्र दैनिक हिन्दुस्तान के माध्यम से निजी क्षेत्रों के अतिरिक्त केन्द्र और राज्य सरकारों से विज्ञापन प्राप्त कर करोड़ों-करोड़ का आर्थिक लाभ उठा रहे हैं।

मंटू शर्मा ने अपने परिवाद-पत्र में आगे आरोप लगाया है कि ‘‘केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं उपक्रमों से संबंधित विज्ञापन दृश्य एवं प्रचार निदेशालय (डीएवीपी), भारत सरकार के माध्यम से और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा उपक्रमों से संबंधित विज्ञापन राज्य सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के माध्यम से समाचार पत्रों को सरकारी विभागों के विज्ञापन प्रसारित किए जाने की व्यवस्था लागू है। सरकार के द्वारा प्रसारित विज्ञापनों का भुगतान समाचार पत्र को सरकारी मद से किया जाता है। सभी अभियुक्तगण ने भारत के प्रेस रजिस्ट्रार की अनुमति प्राप्त किए बिना ही भागलपुर से दैनिक हिन्दुस्तान समाचार-पत्र के संस्करण का प्रकाशन शुरू कर दिया। दैनिक हिन्दुस्तान का भागलपुर से प्रकाशन प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 के प्रावधानों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। आश्यर्च की बात है कि अभियुक्तगण सरकार के समक्ष झूठा तथा फर्जी कागजात पेशकर विज्ञापन भी प्राप्त करने लगे और करोड़-करोड़ रूपये विज्ञापन मद से सरकारी खजाने से भुगतान भी ले चुके हैं।’’

मंटू शर्मा ने अपने परिवाद-पत्र में आगे आरोप लगाया है कि ‘‘अभियुक्तगण प्रेस रजिस्ट्रार से अनुमति प्राप्त किए बिना ही कानूनी बाध्यता की पूर्णतः अनदेखी कर दैनिक हिन्दुस्तान का मुंगेर संस्करण प्रकाशित करते आ रहे हैं। अभियुक्तगण ने विगत ग्यारह वर्षों से दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन के जरिए लगभग दो सौ करोड़ रुपये का सरकारी विज्ञापन अवैध ढंग से प्रकाशित कर धोखा देकर अवैध कमाई की है। प्रेस एवं रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 5 और 6 में स्पष्ट प्रावधन है कि जिला दंडाधिकारी, प्रेसीडेन्सी अथवा सब-डिवीजनल दंडाधिकारी द्वारा सत्यापित घोषणा पत्र के बिना किसी भी रूप में अखबार प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में नियम का उल्लंघन दंडनीय अपराध है।’’

मंटू शर्मा के परिवाद-पत्र में कहा गया है- ‘‘अभियुक्तगण विगत ग्यारह वर्षों से जिला दंडाधिकारी द्वारा बिना प्रमाणीकृत घोषणा-पत्र के भागलपुर से दैनिक हिन्दुस्तान का प्रकाशन कर रहे हैं। अभियुक्तगण मुंगेर के जिला दंडाधिकारी के द्वारा बिना प्रमाणीकृत घोषणा-पत्र के दैनिक हिन्दुस्तान का ‘‘मुंगेर संस्करण’’ विगत दो वर्षों से प्रकाशित करते आ रहे हैं। बिहार सरकार की घोषित विज्ञापन मंटू शर्मानीति कहती है कि बिना सत्यापित घोषणा-पत्र के किसी भी अखबार या पत्रिका को विज्ञापन नहीं दिया जा सकता है। परन्तु सभी अभियुक्तगण जालसाजी और फर्जी कागजातों के आधार पर केन्द्र और राज्य सरकारों का करोड़ों-करोड़ का विज्ञापन प्राप्त कर सरकारी खजानों को चूना लगा रहे हैं। कंपनी के इस फर्जीवाड़ा और गोरखधंधा में संबंधित विभागों की मिली भगत है और यह एक गहन जांच का विषय है।’’

वादी मंटू शर्मा ने परिवाद-पत्र में लगाए आरोप के समर्थन में दैनिक हिन्दुस्तान के 30 जून, 2011 और 01 जुलाई, 2011 के मुंगेर संस्करणों के एक-एक अंक को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश किया है। 30 जून, 2011 तक दैनिक हिन्दुस्तान प्रबंधन ने अपनी प्रिंट लाइन में फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर 44348।1986 प्रकाशित किया जबकि अभियुक्तों ने 01 जुलाई, 2011 को प्रिंट लाइन में रजिस्ट्रेशन नम्बर के स्थान पर ‘‘आवेदित’’ प्रकाशित किया है। श्री शर्मा ने अपने आरोप के समर्थन में दूसरा साक्ष्य जिलाधिकारी (भागलपुर) की जांच रिपोर्ट, जिसका पत्रांक-145 (जि.ज.स.) दिनांक 3 अप्रैल, 2010 है, को न्यायालय में पेश किया है। इस जांच रिपोर्ट में जिलाधिकारी ने उप-प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली, को पत्र लिखकर सूचित किया है कि दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर के प्रकाशन के पंजीयन का कोई दस्तावेजी साक्ष्य कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। श्री शर्मा ने लगाए आरोपों के समर्थन में तीसरा साक्ष्य के रूपमें प्रेस रजिस्ट्रार की अनुभाग अधिकारी पूर्णिमा मलिक की वह रिपोर्ट संलग्न की है जिस रिपोर्ट में पूर्णिमा मलिक ने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, पटना के सचिव विवेक कुमार सिंह को सूचित किया था कि -‘‘पी.आर.बी. एक्ट, 1867 के अनुसार ‘हिन्दुस्तान’ समाचार पत्र का मुद्रण केवल पटना से ही हो सकता है क्योंकि इस कार्यालय द्वारा केवल पटना से ही मुद्रण की स्वीकृति प्राप्त है। यदि इस समाचार पत्र का मुद्रण मुजफ्फरपुर एवं भागलपुर से करना चाहते हैं, तो इन दोनों स्थानों से भी घोषणा-पत्र देना होगा।’’ यह पत्र पूर्णिमा मलिक ने पत्र संख्या-4 (विविध) 2006-आर-1, दिनांक-20-04-2006 के जरिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के तात्कालीक सचिव विवेक कुमार सिंह को श्री सिंह के पत्रांक- विज्ञापन-48-01(2006-247) सू.ज.स.वि. पटना, दिनांक-22-03-2006 के जवाब में दिया था। श्री शर्मा ने अपने आरोप के समर्थन में चौथा साक्ष्य के रूप में वित्त (अंकेक्षण) विभाग के जांच-प्रतिवेदन संख्या-195(2005-2006) को प्रस्तुत किया जिसमें वरीय अंकेक्षक दिनेश्वर गोस्वामी ने उजागर किया है कि दैनिक हिन्दुस्तान ने जिलाधिकारी के समक्ष विहित प्रपत्र में कोई घोषणा पत्र नहीं किया और न ही कंपनी रजिस्ट्रार से अनुमति प्राप्त की और न ही भारत सरकार के रजिस्ट्रार से अखबार के मुद्रण (प्रकाशन) की अनुमति ही ली। वरीय अंकेक्षक ने यह भी उजागर किया कि किस प्रकार दैनिक हिन्दुस्तान ने अवैध प्रकाशन के जरिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से करोड़-करोड़ रुपया का अवैध विज्ञापन प्राप्त किया।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट

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