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फोन पर धमकी देने का मामला : पत्रकार राकेश शुक्‍ला ने दी अनशन की चेतावनी

: एसपी गंगापार ने पत्रकारों से किया अभद्र व्‍यवहार : इलाहाबाद में पत्रकार को जान से मारने की धमकी के बाद पुलिस के रवैये के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पांच दिनों तक पत्रकारों के संगठनों से लेकर सपा के नवनिर्वाचित विधायक और एसपी गंगापार से गुहार लगाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। अब पत्रकार राकेश शुक्ला ने खुद अपनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। वह जल्द ही सूबे की राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने भूख हड़ताल करने जा रहे हैं।

: एसपी गंगापार ने पत्रकारों से किया अभद्र व्‍यवहार : इलाहाबाद में पत्रकार को जान से मारने की धमकी के बाद पुलिस के रवैये के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पांच दिनों तक पत्रकारों के संगठनों से लेकर सपा के नवनिर्वाचित विधायक और एसपी गंगापार से गुहार लगाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। अब पत्रकार राकेश शुक्ला ने खुद अपनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया है। वह जल्द ही सूबे की राजधानी लखनऊ में विधानसभा के सामने भूख हड़ताल करने जा रहे हैं।

19 मार्च को दोपहर डीआईजी डी प्रकाश से मिलकर राकेश शुक्ला ने दरख्वास्त दी। कहा है कि नवाबगंज थाने का एसओ महामाया प्रसाद और लालगोपालगंज का चौकी इंचार्ज जयनारायण राय से जान का खतरा है। दोनों उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं। डीआईजी ने मामले की जांच शुरू करा दी है। पत्रकारों के मान-सम्मान की लड़ाई अकेले शुरू करने वाले राकेश शुक्ला ने शासन-प्रशासन के लोगों को फैक्स भेजकर अनशन करने की घोषणा की है। 20 मार्च को कई अखबारों- अमर उजाला, हिंदुस्तान, आज, डेली न्यूज एक्टिविस्ट आदि ने प्रमुखता से खबर छापी है।

पता नहीं क्यों, शासन के लोग इस मामले की अनदेखी कर रहे हैं। दिल्ली-लखनऊ में बैठे पत्रकारों और मानवाधिकार के पैरोकार व विभिन्न सामाजिक संगठनों को यह प्रकरण गंभीर नहीं लग रहा है। नौ दिन बाद भी कोई संगठन साथ नहीं आ सका है। हे अफसरों से रिश्‍ते बेहतर रखने वाले अति चतुर-सुजान पत्रकारिता के मठाधीशों! कल आपके साथ ऐसा होगा तो कौन साथ दिखेगा। मत भूलिए, ज्यादा चतुर ही पहले बूड़ता है। जो तटस्थ हैं वक्त लिखेगा उनका भी इतिहास।

प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जब राजधानी में मीडिया के सामने सूबे में बिगड़ चुकी कानून व्यवस्था को दुरूस्त करने और सत्ता से अपराधी को दूर रखने की बात बार-बार दुहरा रहे थे तभी प्रदेश के प्रमुख जनपद इलाहाबाद में एक पत्रकार अपनी जान की सुरक्षा के लिए अफसरों के दफ्तर का दरवाजा खटखटा रहा था। सत्ता के गठन होते ही उसे फोन पर धमकाया गया। कहा गया- ‘अब हमारी सरकार बन गई है, सोच-समझकर खबर लिखो नहीं तो गोली से उड़ा दिया जाएगा। कोई भी नहीं बचा पाएगा।‘ नए मुख्यमंत्री के बयानों से वह भी उम्मीद लगा बैठा कि पढ़ा-लिखा नौजवान सीएम बना है। पत्रकार का मामला है, कार्रवाई तेज होगी। अफसोस, जल्द ही उसका मोहभंग हो गया।

खासकर उस समय, जब ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन जिलाध्यक्ष अयोध्या प्रसाद केसरवानी के नेतृत्व में आठ सदस्यीय पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल एसपी गंगापार जयप्रकाश पांडेय से मिला। एसपी गंगापार ने तो हद कर दी। सारी मर्यादा का जनाजा निकाल दिया। जिलाध्यक्ष केसरवानी जैसे ही अपनी बात शुरू की, वैसे ही एसपी गंगापार ने जाने क्यों चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। आपा खो दिया। कोई बात सुनने को तैयार नहीं थे। केसरवानी हतप्रभ। आफिस स्टाफ मौके पर जमा हो गया। अचानक बदले घटनाक्रम से अवाक कुछ पत्रकार साथियों ने क्लीपिंग बनानी शुरू कर दी। प्रतिनिधिमंडल में साथ गया मैं यह सोचने को मजबूर हो रहा था कि यह भी अफसरों का शिष्‍ठमंडल से मिलने का कोई तरीका है भला, ऐसे लोगों को इतनी जिम्मेदारी का पद कैसे सौंप दिया जाता है?


इससे संबंधित खबरों को पढ़ने के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें – 

''सरकार हमारी है, ज्‍यादा खबर छापी तो गोली से उड़ा देंगे''

पत्रकार को फोन पर धमकी देने वाला गिरफ्तार


बहरहाल, करीब पंद्रह मिनट तक आफिस के भीतर पत्रकारों ने जमकर जलालत झेली। मुलाकातियों से अफसर कैसे मिलकर समस्या सुनते हैं, इसकी झलक भी दिखी। खिसियाये पत्रकार बाहर निकले। फैसला हुआ आज का दिन ही खराब है। साथियों में कानाफूसी-यार, इस एसपी ने तो काफी बेइज्जत कर दिया। पत्रकारों से इस तरह पेश आने वाला एसपी आम लोगों से कैसे पेश आता होगा? साथियों ने बताया-बसपा का एजेंट है, सरकार को बदनाम करने का खेल कर रहा है। इस बीच झेंपते हुए जिलाध्यक्ष चुपचाप अपनी बोलेरो पर बैठे आराम से वापस लौट गए। दूसरे दिन हिंदी साहित्य सम्मेलन में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का होली मिलन समारोह था। उसकी तैयारी अधूरी ही पड़ी थी। दूसरे दिन यानि 17 मार्च को होली मिलन समारोह में घंटों अबीर-गुलाल उड़ाए जाते रहे। पत्रकारों के कार्यक्रम में अफसर भी चेहरे पर जबरन मुस्कान चिपकाए आए। पत्रकार-अफसरों के हम प्याला हम निवाला बनते देर न लगी। जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में ठंडाई-भांग के दौर चले। गुझिया तोड़ी जाती रही। हंसी-ठहाकों के बीच किसी ने भी अपने पत्रकार साथी की सुध नहीं ली। वे अकेले पैदल ही आफिसों का चक्कर काटते रहे। भुक्तभोगी राकेश शुक्ला इसी संगठन के जिला संयुक्त मंत्री भी हैं।

आखिरकार, राकेश ने सपा से जीते नवनिर्वाचत विधायक व पूर्व मंत्री अंसार अहमद से टेलीफोन पर संपर्क कर नवाबगंज एसओ, लालगोपालगंज चौकी इंचार्ज की साजिश की जानकारी देकर बताया कि उनकी जान को खतरा है। सपा सरकार को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। खबर छापने पर जान से मारने की धमकी दी गई है। इसमें दोनों दरोगाओं की भूमिका संदिग्ध है। कार्रवाई के दौरान ही समूचे पत्रकार बिरादरी और पत्रकारिता पेशे को दोनों दरोगाओं ने सार्वजनिक तरीके से जमकर गरियाया। विधायक अंसार अहमद ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया।   

क्या है मामला : लालगोपालगंज कस्बे में होली के दौरान दो वर्गों में टकराव और पत्थरबाजी से स्थानीय पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर अमृत प्रभात में छपी थी। राकेश  शुक्ला इलाके की आपराधिक घटनाओं की खबर निकालने में एक्सपर्ट समझे जाते हैं। इनकी कई खबरों ने पुलिस कार्रवाई की धज्जियां उड़ाई हैं। क्राइम की लगातार खबर छापने से इलाकाई पुलिस से लेकर एसपी गंगापार तक राकेश शुक्ला से खार खाए बैठे रहते हैं। 11 मार्च 2012 को दोपहर इनके मोबाइल पर अज्ञात फोन आया। कहा गया-अब मेरी सरकार बन गई है, सोच समझकर खबर लिखो नहीं तो गोली से उड़ा दिया जाएगा। राकेश ने उसी दिन नवाबगंज थाने में तहरीर दी। सरकार को बदनाम करने और मीडिया को धमकाने के मामले को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। यहां तक विभागीय अफसरों को भी घटना की जानकारी नहीं दी गई। पुलिस का रवैया देख स्थानीय पत्रकार नवाबगंज थाने पहुंचे। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

दबाव बढ़ता देख दरोगा सर्विलांस जांच के बाद लालगोपालगंज के एक युवक को थाने लाया और राकेश को थाने बुलाकर समझौता करने का दबाव डाला। इस बीच कई अन्य पत्रकार भी थाने पहुंच गए। राकेश शुक्ला का कहना है कि समझौता से इनकार करने पर दोनों दरोगाओं ने आरोपी युवक के सामने ही पत्रकारों की औकात देख लेने की बात कह डाली। पत्रकारिता की पूरी बिरादरी को जमकर गरियाता रहा। इससे यहां के पत्रकारों में रोष है। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, पुलिस महानिदेशक, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मांग करने वालों में राजीव ओझा, एसएस पांडेय, सुरेंद्र प्रताप नारायण पांडेय, एक्टिविस्ट राजमंगल समेत कई अन्य लोग शामिल हैं। यहां के पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि यही मामला अगर अति पिछड़े ग्रामीण इलाके के बजाय दिल्ली, लखनऊ, पटना, भोपाल में होता तो क्या पत्रकार संगठन ऐसे ही कान में तेल डाले पड़े रहते? मदद की दरकार है।

इलाहाबाद से वरिष्‍ठ पत्रकार शिवाशंकर पाण्‍डेय की रिपोर्ट.

 

 
 

 
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