Musafir Baitha : पटना से प्रकाशित अखबार 'हिंदुस्तान' में या तो कोई ऐसा इतिहासकार बैठा है जो दैवी गुणों से युक्त है और उसके हाथ में चमत्कारी कुदाल है जिससे वह नए ऐतिहासिक तथ्यों का उत्खनन कर डालता है. आज के अंक में (पृष्ठ-०८) इसमें बताया गया है कि 'शेरशाह की मस्जिद का निर्माण १५४१ में हुआ था'. आपके बाल-बच्चे यदि यही अखबार पढते हैं तो वे इतिहास पुस्तक में 'शेरशाह की मस्जिद' नहीं वरन 'शेरशाह का मकबरा' पढ़ कर अपना बाल नोचेंगे.
आज के ही अखबार में आप कुढ़मगज़ी में नहाये और भी कई समचार लगे देख सकते हैं जो पहले पृष्ठ से ही शुरू हैं. बस, सावधानी से पढ़ने की जरूरत है. यदि कल शाम आप गाँधी मैदान घूम आये हैं तो इन अखबारीलालों के मिथ्या-संवाद को और अधिक जान सकेंगे. पीत-पत्रकारिता का चरम आप इस बिहारी 'हिंदुस्तान' में घटित होता देख सकते हैं.
मुसाफिर बैठा के फेसबुक वॉल से साभार





