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पीपुल्‍स समाचार, इंदौर के कर्मचारियों को नहीं मिला फरवरी का वेतन

पीपुल्‍स समाचार, इंदौर के कर्मचारी परेशान हैं. उन्‍हें अब तक फरवरी महीने का वेतन नहीं मिला है, जबकि मार्च का महीना भी खतम होने के कगार पर पहुंच गया है. कर्मचारियों को ये भी नहीं बताया जा रहा है कि उनकी सेलरी कब आएगी. इंदौर यूनिट के किसी भी विभाग की सेलरी नहीं आई है. पूछने पर प्रबंधन के लोग कर्मचारियों से सीधे मुंह बात तक नहीं कर रहे हैं. कर्मचारी कहते हैं कि सेलरी के बारे में पूछे जाने पर उन्‍हें कहा जा रहा है कि दरवाजा खुला है, जिसे जाना हो जा सकता है.

पीपुल्‍स समाचार, इंदौर के कर्मचारी परेशान हैं. उन्‍हें अब तक फरवरी महीने का वेतन नहीं मिला है, जबकि मार्च का महीना भी खतम होने के कगार पर पहुंच गया है. कर्मचारियों को ये भी नहीं बताया जा रहा है कि उनकी सेलरी कब आएगी. इंदौर यूनिट के किसी भी विभाग की सेलरी नहीं आई है. पूछने पर प्रबंधन के लोग कर्मचारियों से सीधे मुंह बात तक नहीं कर रहे हैं. कर्मचारी कहते हैं कि सेलरी के बारे में पूछे जाने पर उन्‍हें कहा जा रहा है कि दरवाजा खुला है, जिसे जाना हो जा सकता है.

जानकारी के अनुसार पीपुल्‍स समाचार इंदौर में काम के दिनों की गिनती 26 से 25 का माना जाता है. इसी आधार पर कर्मचारियों को सेलरी दी जाती है. सेलरी हर महीने के शुरुआती सप्‍ताह तक मिल जाती है. परन्‍तु इस बार तो फरवरी माह की सेलरी आई ही नहीं और मार्च महीना भी लगभग खतम होने के कगार पर है. पिछले माह की सेलरी नहीं आने से छोटे वेतन पर काम करने वाले कर्मचारी परेशान हैं. ये महीना तो किसी तहर उधार लेकर चला लिए पर अब मुश्किल बढ़ती जा रही है.

सूत्रों का कहना है संपादक रमन रावल भी सेलरी के बारे में पूछने पर कर्मचारियों से ठीक से बात नहीं कर रहे हैं. कर्मचारियों को सेलरी के बारे में कोई सही जानकारी नहीं दी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि इंदौर में अस्‍सी लाख रुपये विज्ञापन का बकाया है, जिसकी वसूली नहीं हुई है. इसके चलते ही प्रबंधन सभी कर्मचारियों की सेलरी रोक रखी है. इस संदर्भ में एडिटोरियल, टेक्निकल और सर्कुलेशन के कर्मचारियों का कहना है कि अगर पैसा बकाया है तो विज्ञापन विभाग को सजा दी जाए, सभी विभाग के कर्मचारियों को क्‍यों परेशान किया जा रहा है?

 

 
 

 
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