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ईमानदार पत्रकार उमेश को भगोड़ा कहने वाला है कौन?

हजारीबाग सन्मार्ग कार्यालय के पूर्व प्रभारी उमेश प्रताप ने अपने साथियों के शोषण और प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ खुला बगावत करते हुए अपने पद से त्याग पत्र दिया है। आपके न्यूज साइट पर कथित भ्रष्टाचार विरोधी मंच के माध्यम से एक खबर दी गयी है कि सन्मार्ग अखबार का कार्यालय रातोंरात बंद हो गया और पूर्व ब्यूरो चीफ समान लेकर भाग गये। हरिनारायण सिंह के संपादक बनने के बाद खलबली मची है।

हजारीबाग सन्मार्ग कार्यालय के पूर्व प्रभारी उमेश प्रताप ने अपने साथियों के शोषण और प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ खुला बगावत करते हुए अपने पद से त्याग पत्र दिया है। आपके न्यूज साइट पर कथित भ्रष्टाचार विरोधी मंच के माध्यम से एक खबर दी गयी है कि सन्मार्ग अखबार का कार्यालय रातोंरात बंद हो गया और पूर्व ब्यूरो चीफ समान लेकर भाग गये। हरिनारायण सिंह के संपादक बनने के बाद खलबली मची है।

इन सारे खबरों के जानकार तथा कथित मंच के मुख्य कर्ताधर्ता को भी सामने आना चाहिये ताकि समाज के लोग भी जान सकें कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये हजारीबाग में कुदाल चलाने वाला है कौन? मैं इसे पूरे प्रकरण को जानता हूं इसलिए टिप्पणी कर रहा हूं। नवंबर 2010 में उमेश प्रताप हजारीबाग कार्यालय का दायित्व संभाला था। उस वक्त झारखंड के अच्‍छे पत्रकारों में गिने जाने वाले रजत कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीय सहारा (देहरादून) के संपादक पद से त्याग-पत्र देकर सन्मार्ग रांची में संपादक पद पर ज्‍वाइन किया था।

झारखंड की मिट्टी से जुड़े श्री गुप्ता ने सबसे पहले हिन्दुस्तान से उमेश प्रताप का त्याग-पत्र दिलवाकर सन्मार्ग से जोड़ा। उन्होंने पूरी निष्ठा व ईमानदारी से राज्य के विभिन्न जिलों में सेवा दे रहे पत्रकारों की एक टीम बनायी। श्री गुप्ता बाद में पत्रकारों को वेतन/मानदेय और अन्य सवालों को लेकर प्रबंधन से बगावत कर दी। प्रबंधन की नीतियों से खफा होकर बाद में उन्होंने अपने पद से त्याग पत्र भी दे दिया। हजारीबाग में सन्मार्ग कार्यालय खोलने से लेकर त्याग पत्र देने तक प्रबंधन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी थी, उमेश प्रताप जी ने खुद आफिस को व्यवस्थित किया था।

और जब तक श्री प्रताप सन्मार्ग में कार्यरत रहे लगातार बैठकों में अपने सहयोगी पत्रकारों की समस्याओं को उठाते रहे। कई बार उन्होंने त्याग-पत्र देने की पेशकश की लेकिन उन्हें मनाया जाता रहा। व्यवसायिकता की दौर में हिचकोले ले रही पत्रकारिता में अपनी बेदाग छवि और बेबाक टिप्पणी के लिए पहचाने जाने वाले उमेश प्रताप ने अपने दायित्वों से संबंधित सारी कार्रवाइयां पूरी करने के बाद त्‍याग पत्र दिया। उमेश प्रताप ईमानदारी से पत्रकारिता करते हैं। पत्रकारिता के लंबे जीवन में उनके चरित्र पर उंगली उठाने की हिम्मत किसी ने नहीं की। उनका त्याग पत्र पत्रकारों के शोषण के खिलाफ बगावत है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. 

 

 
 

 
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