आपने नई दुनिया से उसके ग्रुप एडिटर उमेश त्रिवेदी के इस्तीफे की खबर पढ़ ली. अब पढ़िए उनका लिखा इस्तीफानामा. यह एक ऐतिहासिक इस्तीफानामा है. जिस शख्स ने नई दुनिया जैसे अखबार के साथ 38 साल काम किया हो और ट्रेनी से लेकर ग्रुप एडिटर तक की यात्रा एक ही बैनर के साथ कर ली हो, जिसने कई महान संपादकों के सानिध्य में पत्रकारिता के ढेर सारे रंगरूप देखे हों, जिसने अखबार को बढ़ते फलते फूलते और अब बिकते हुए देखा हो, उसका इस्तीफानामा ऐतिहासिक होगा ही. लेकिन इसके ऐतिहासिक होने के कई और कारण हैं. उमेश त्रिवेदी ने अपने इस्तीफे में माना है कि नई दुनिया के सामने काफी बड़ा संकट है.
संभवतः यह पहली बार होगा जब नई दुनिया से जुड़ा कोई सीनियर शख्स नई दुनिया के सामने खड़े संकट को लिखित में कुबूल कर रहा हो. भावुकता के साथ लिखे गए इस इस्तीफानामा में ढेर सारे तथ्य व प्रकरण भी बताए गए हैं. आखिर में उमेश ने अपने नई दुनिया के साथियों को बेहद स्नेहिल तरीके से संबोधित किया है. इस पत्र को पढ़ते हुए हर संवेदनशील शख्स अपना कोई न कोई अक्स इसमें तलाश सकेगा. पत्र जेपीजी फार्मेट में है, जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया
(नई दुनिया पर जाने-माने पत्रकार हरिवंश का लिखा विश्लेषण पढ़ने के लिए क्लिक करें- नई दुनिया का पराभव क्यों?)







