भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री, सांसद, पीएसी के अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी के व्यवहार से इलाहाबाद का हर पत्रकार स्तब्ध है. क्या राष्ट्रीय स्तर का नेता इस तरह की बात कर सकता है? क्या वो अपना सयंम खो सकता है? इलाहाबाद में आजतक के पत्रकार विमल श्रीवास्तव भी उस प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद थे. विमल भी डा. जोशी के इस व्यवहार से सन्न रह गए. इस बारे में विमल का कहना है कि डा. जोशी ने पत्रकारों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया वो कतई उचित नहीं था. एक वरिष्ठ राजनेता को इस तरह से आपा नहीं खोना चाहिए था और ना ही पत्रकारों पर झूठी हंसी हंसनी चाहिए थी.
आईबीएन7 के पत्रकार मनीष पालीवाल भी डा. जोशी के इस रूप से हतप्रभ हैं. मनीष बताते हैं कि उन्होंने कहा कि आपलोगों को इस तरह के सवाल करते हुए शर्म नहीं आती. मनीष कहते हैं कि हमें क्यों शर्म आएगी. हमारा काम ही सवाल पूछना है. और ये आरोप हमने नहीं लगाए हैं बल्कि कभी आपलोगों की पार्टी के साथ खासतौर पर जुड़ा रहा व्यक्ति लगा रहा है तो इसमें शर्म हमें क्यों आपको आनी चाहिए. मनीष ने कहा कि खिसियानी हंसी हंसकर डा. जोशी सवालों का जवाब देने से बचना चाह रहे थे इसलिए उन्होंने पत्रकारों पर ही हंसने और शर्म आने का नाटक करने वाला रवैया अपनाया.
स्टार न्यूज के पत्रकार मोहम्मद मोइन तो एक राष्ट्रीय स्तर के नेता से इस तरह के व्यवहार की अपेक्षा नहीं रखते हैं. मोइन बताते हैं कि जिस तरीके से उन्होंने पत्रकारों से व्यवहार किया वो सही नहीं है. आप शिक्षक भी रहे हैं फिर भी आप में सयंम नहीं है. आप पर यह आरोप पत्रकारों ने नहीं लगाया था बल्कि उस व्यक्ति ने लगाया था, जिसे आपके पार्टी के लोग समर्थन दे रहे थे. प्रेस कांफ्रेंस आपने बुलाई थी, हम आपके पास नहीं गए थे कि आपने झिड़क दिया. मोइन कहते हैं कि डा. जोशी को यह पहले सोचना चाहिए था. उन्होंने जिस तरह से दो कौड़ी की बातें कहीं कि आपके कान में कहा था, शर्म आ रही है वो उनके कद के नेता को शोभा नहीं देता.
टाइम्स नाउ के पत्रकार वीरेंद्र राज का कहना है कि डा. जोशी प्रोफेसर रहे हैं इसलिए उन्हें पत्रकार भी छात्र ही लगते हैं. इसके पहले भी जब पत्रकार सवाल करते रहे हैं तो वो कभी ढंग से जवाब नहीं देते हैं. इस बार तो उन्होंने हद ही कर दी. आप वरिष्ठ नेता हैं आप इन सवालों का जवाब नहीं देते, नो कमेंट कह कर टाल देते, पर उन्होंने तो जिस तरह की बातें कहीं वो उनके जैसे व्यक्ति के मुंह से सुनना आश्चर्यजनक है. इसके बाद वो इलाहाबादी होने की बात भी कहते हैं. क्या यही तरीका है पत्रकारों से बात करने का यह सोचना चाहिए था डा. जोशी को, पर वो तो बनावटी हंसी हंसकर पत्रकारों को और बेइज्जत करना चाह रहे थे.
न्यूज एक्सप्रेस के पत्रकार मनीष वर्मा भी डा. जोशी का यह रूप देखकर भौचक्क रहे गए. मनीष कहते हैं कि डा. जोशी जैसे सीनियर लीडर को आपा नहीं खोना चाहिए था. पत्रकारों का काम ही है सवाल पूछना. अगर उन्हें जवाब नहीं देना था तो सलीके से टाल देते, जैसे तमाम वरिष्ठ नेता करते हैं. कोई पत्रकारों को थोड़ी जलील करता है. डा. जोशी को जब अपनी करनी पर शर्म नहीं आ रही है तो फिर पत्रकार सवाल पूछने में क्यों शर्माएंगे? कम से कम उन्हें आपने से बाहर नहीं जाना चाहिए था, और जिस तरीके से उन्होंने पत्रकारों से व्यवहार किया उसकी तो निंदा की जानी चाहिए.
जनसंदेश चैनल के पत्रकार सैय्यद रजा भी जोशी के इस रूप मर्यादा के खिलाफ बताते हैं. सैय्यद कहते हैं कि डा. जोशी टीचर रह चुके हैं उन्हें पत्रकारों से इस तरीके से पेश नहीं आना चाहिए था. उन्हें अपनी तथा अपने पद की मर्यादा समझनी चाहिए थी. ये सवाल हमने अपनी तरफ से नहीं किए. आप नेता हैं और आप पर आप की पार्टी से ही नजदीकी रखने वाला कोई इल्जाम लगा रहा है तो हमारा तो फर्ज बनता है कि हम जनता को इन सारी बातों की सच्चाई बताएं. ये और भी अनुचित रहा कि प्रेस कांफ्रेंस आपने बुलाया और सवाल किया गया तो भड़क गए.





