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पत्रिका के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज, पत्रकारों का पास भी निरस्‍त

 छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही को विकृत रूप स्वरुप में प्रकाशित करने पर दैनिक समाचार पत्र ‘पत्रिका’ के खिलाफ विधानसभा की अवमानना का मामला विशेषाधिकार समिति के हवाले कर दिया गया है. साथ ही पत्रिका के पत्रकारों को जारी किये गए पत्रकार दीर्घा के प्रवेश-पत्रों को भी निरस्त कर दिया गया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने शनिवार को सदन में यह व्यवस्था दी.

 छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही को विकृत रूप स्वरुप में प्रकाशित करने पर दैनिक समाचार पत्र ‘पत्रिका’ के खिलाफ विधानसभा की अवमानना का मामला विशेषाधिकार समिति के हवाले कर दिया गया है. साथ ही पत्रिका के पत्रकारों को जारी किये गए पत्रकार दीर्घा के प्रवेश-पत्रों को भी निरस्त कर दिया गया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने शनिवार को सदन में यह व्यवस्था दी.

विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि शुक्रवार को सभा में कृषि विभाग की मांगों पर चर्चा के समय हुए वाद-विवाद से संबंधित कार्यवाही के अंशों को उन्होंने विलोपित करते हुए उनके प्रकाशन को निषिद्ध किया था और सदन में इसका स्पष्ट उल्लेख भी अध्यक्षीय व्यवस्था में किया था. सभा की कार्यवाही के प्रकाशन पर नियंत्रण और यदि आवश्यक हो तो उसके प्रकाशन को निषिद्ध करने की शक्ति सभा को प्राप्त है. सभी की कार्यवाही से विलोपित अंश सभा की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होता है और ऐसे अंशों को प्रकाशित करना सभा की अवमानना की श्रेणी में आता है.

पत्रकार दीर्घा के पत्रकारों, जिनके ऊपर सभा की कार्यवाही को प्रसारित करने का उत्तरदायित्व है, से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सभा की कार्यवाही को उसी स्वरूप में प्रकाशित करें, जिस स्वरुप में आसंदी द्वारा अनुमति दी गयी हो. अध्यक्ष ने कहा कि मुझे अत्यंत दुःख के साथ उल्लेख करना पड़ रहा है कि रायपुर से प्रकाशित समाचार पत्र ‘पत्रिका’ ने 24 मार्च के अंक में आसंदी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद निर्देशों की अवहेलना करते हुए विलोपित अंशों को प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है और इस प्रकार प्रथम दृष्टया सभा की अवमानना की है.

मामला क्या है? : छत्तीसगढ़ विधान सभा में शुक्रवार को कृषि विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहु और कांग्रेस विधायक धर्मजीत सिंह के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई थी. नोंक-झोंक के बाद धर्मजीत सदन से जाने लगे थे, उन्हें कांग्रेस के दूसरे सदस्यों ने रोका. विधानसभाध्यक्ष की समझाइश के बाद मामले का पटाक्षेप हो गया. बाद में मंत्री चंद्रशेखर साहु ने अपनी ओर से खेद भी व्यक्त किया. धर्मजीत सिंह ने भी अफ़सोस जताया. अध्यक्ष ने असंसदीय शब्दों को विलोपित कर दिया था. साभार : नईदुनिया

 

 
 

 
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