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नईदुनिया में चला छंटनी का चाबुक, सैकड़ों लोगों की छुट्टी

बड़ी दुखद खबर है. सैकड़ों मीडियाकर्मियों को सड़क पर आना पड़ा है. नईदुनिया के जागरण के हाथों बिकने की कवायद के क्रम में छंटनी का काम किया जा रहा है. इस क्रम में मध्य प्रदेश और दिल्ली की यूनिटों के सैकड़ों लोगों को तीन-तीन महीने का चेक थमा कर पहली अप्रैल से घर बैठने के लिए बोल दिया गया है. दिल्ली में दिनेश सेठिया आए हुए थे. उन्होंने दिल्ली वाले पत्रकारों को बुलाकर बताया कि आप सभी के लिए तीन तीन महीने का चेक लेकर आया हूं, इसे थाम लीजिए और इस माह के आखिरी तारीख को विदा ले लीजिए.

बड़ी दुखद खबर है. सैकड़ों मीडियाकर्मियों को सड़क पर आना पड़ा है. नईदुनिया के जागरण के हाथों बिकने की कवायद के क्रम में छंटनी का काम किया जा रहा है. इस क्रम में मध्य प्रदेश और दिल्ली की यूनिटों के सैकड़ों लोगों को तीन-तीन महीने का चेक थमा कर पहली अप्रैल से घर बैठने के लिए बोल दिया गया है. दिल्ली में दिनेश सेठिया आए हुए थे. उन्होंने दिल्ली वाले पत्रकारों को बुलाकर बताया कि आप सभी के लिए तीन तीन महीने का चेक लेकर आया हूं, इसे थाम लीजिए और इस माह के आखिरी तारीख को विदा ले लीजिए.

उधर, जागरण में मर्जर की खबर के बीच प्रबंधन के बुलावे पर इंदौर पहुंचे नईदुनिया के सभी एडीशन के यूनिट हेड और संपादक प्रबंधन की घुट्टी पीने के बाद अपने-अपने एडीशन में वापस लौट चुके हैं और इसके साथ ही नईदुनिया में छंटनी का चाबुक चलने लगा है. अकेले ग्वालियर एडिशन में 20 लोगों को नवदुर्गा के मौके पर तीन-तीन माह की सैलरी देकर घर बैठा दिया गया है. इनसे यूनिट हेड और संपादक ने अपने सामने बैठकर इस्तीफे लिखवाए. इनमें से अधिकांश लोग तो ऐसे हैं जो ग्वालियर में नईदुनिया की लॉचिंग से जुड़े हुए थे. जिन बीस लोगों को घर बैठाया गया है उनमें सभी लोग लो सैलरी वाले हैं. इसमें चपरासी भी हैं और ड्राइवर भी हैं. डीटीपी ऑपरेटर भी हैं तो प्रूफ रीडर भी. मार्केटिंग से जुड़े लोग भी छंटनी के दायरे में आने वाले लोगों में शामिल हैं. जो लोग संपादक के अधीन थे, उन्हें राकेश पाठक ने अपने कक्ष में बैठाया और रोनी सी सूरत में प्रबंधन का फरमान सुनाते हुए कहा कि आप सभी को तीन-तीन माह की सैलरी देकर संस्थान के दायित्वों से आज से ही मुक्त किया जाता है. वैसे आप चाहें तो अपनी सेवाएं आप 31 मार्च तक दे सकते हैं. जिन 20 लोगों को तीन-तीन माह की सैलरी के लिफाफे थमाए गए उन्होंने भी इस्तीफा मांगने वाले राकेश पाठक को टका से जवाब देते हुए कह दिया कि यदि ऐसे ही लो सैलरी वालों को निपटाया जाएगा. बलि ली जाएगी तो फिर नईदुनिया के लिए सफेद हाथी (ऊंची कुर्सी पर बैठने वाले) बन गए लोग भी नहीं बच पाएंगे. ऐसे लोगों से आने वाला प्रबंधन हिसाब-किताब लेगा और इसके साथ ही इन लोगों ने सैलरी का लिफाफा लेने के साथ ही संस्थान को अलविदा कह दिया. यहां बताना जरूरी है कि जब से नईदुनिया की कमान जागरण वालों के हाथों में जाने की खबर चली है तभी से नईदुनिया में छंटनी जारी है. ग्वालियर एडीशन से अभी तक 23 लोगों को बाहर किया जा चुका है. यदि नईदुनिया के खबरियों की मानें तो जागरण प्रबंधन ने नईदुनिया प्रबंधन से कह दिया है कि हमें संस्थान पर बोझ बन चुके लोग नहीं चाहिए, इसलिए निचले स्तर पर छंटनी करके आप ही दीजिए, ऊपरी स्तर के लोगों से निपटने के लिए हमारे पास कई एडीशन हैं. हम इन एडीशन में भेजने के लिए ऐसे लोगों के लिए दरवाजे खोलकर रखेंगे. जिन 20 लोगों को घर बैठाया गया है उसमें से एक की भर्ती तो प्लांट के लिए हुई थी. बाद में उससे कंप्यूटर ऑपरेटर का काम लिए जाने लगा और जब उसे निकाला गया तो वजह बताई गई कि उसने दो साल से कोई बिजनिस संस्थान को नहीं दिया है. इसलिए उसे मार्केटिंग टीम से बाहर किया जाता है. जाहिर है यह व्यक्ति संपादक के अहम की भेंट चढ़ गया क्योंकि यह संभव ही नहीं कि एक व्यक्ति संस्थान में फुटबॉल बना एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमता रहे और उसके काम की खबर किसी को न हो. इसके अलावा अधिकांश लोग ऐसे भी हैं जो अकेले ही अपने घर में कमाने वाले थे. नईदुनिया में चल रहे छंटनी के हंटर से लोगों के चेहरों की हंसी गायब है. सभी के चेहरे लटके हुए हैं और मानकर चल रहे हैं कि आज नहीं तो कल हमारी बारी है. इस पूरे मामले में प्रबंधन के मौन ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है.

दिल्ली और ग्वालियर से मिली सूचनाओं पर आधारित. नई दुनिया से जुड़ी कोई सूचना अगर आपके पास भी है तो [email protected] पर मेल कर सकते हैं.

 

 
 

 
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