अभी कुछ ही दिन पहले महुआ न्यूज के कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का तोहफा मिला। मगर यह जानकर ताज्जुब होगा कि यह इंक्रीमेंट स्ट्रिंगरों की बदौलत है। जी हां, निरीह स्ट्रिंगरों के पैसे में कटौती और घपले करके सेलरी बेस्ड कर्मचारियों को इंक्रीमेंट दिया गया। यह बात सही है कि इसमें ग्रुप एडिटर राणा यशवंत की खास भूमिका है। उनके द्वारा ही स्ट्रिंगरों के पेट पर लात मारने जैसी हरकत महुआ ग्रुप में किया गया है। रही बात पुराने स्टाफ को 3 से 5 हजार का इंक्रीमेंट देने की, तो यह गलत है। महुआ में लांचिंग के समय से जुडे कर्मचारियों में से कुछ एक को ही 1 से 2 हजार का इंक्रीमेंट मिल पाया है। 3 से 5 हजार की बढ़ोतरी महुआ के बडे़ अधिकारियों के चापलूसों के लिए हुई है।
अब हम आपको बताते हैं कि आखिर इंक्रीमेंट के पैसे का इंतजाम किस शातिरपना तरीके से किया गया, जबकि पीके तिवारी ने महीनों से चैनल को खर्चे देना बंद कर दिया है। महुआ न्यूज ग्रुप के पास विज्ञापनों की भारी कमी है। महुआ एंटरटेंमेंट का सारा प्राफिट पीके तिवारी ले लेते हैं। ऐसे में राणा जी को पैसे इंतेजाम करने का एक ही उपाय सूझा, वो है निरीह, बेबस, सबकी गाली सुनने वाले स्ट्रिंगरों की कमाई में सेंध लगाना। जहां पहले महुआ में स्ट्रिंगरों को 500 रुपए प्रति खबर दी जाती थी, वहीं अब उन्हें दो से ढाई सौ में ही संतोष करना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, जब किसी परिश्रमी स्ट्रिंगर की कमाई 3 से 5 हजार होने की नौबत आती है तो बिना किसी बात के उसकी खबरें ड्राप कर दी जाती हैं। उसके हिसाब में घपला करके उसे कम रुपए ही भेजे जाते हैं। न्यूज चैनलों के इतिहास में महुआ रिकार्ड बनाने को तुला है कि वह अपने स्ट्रिंगरों को सबसे कम पैसे देने वाला पहला चैनल है। आपको जानकर ताज्जुब नहीं होना चाहिए कि महीने में 25 से 30 खबर भेजने के बावजूद भी यूपी के अधिकांश स्ट्रिंगरों को कई महीनों से 250 से 1200 रुपए की ही पेमेंट की गई है। हिसाब मांगने पर स्ट्रिंगरों को यही जबाव मिलता है कि उपर से आदेश है।
ऐसे तमाम घपले करके जमा पूंजी इंक्रीमेंट के रूप में कर्मचारियों को दी गई है। जहां कर्मचारियों की सेलरी 2 दिन भी लेट हो जाती है तो पूरे आफिस में बवाल हो जाता है, वहीं बेचारे स्ट्रिंगर 6-6 महीनों से पेमेंट की बाट जोह रहे हैं। स्ट्रिंगरों की तरफ से चेनल हेड समेत महुआ के तमाम आकाओं को चैलेंज है कि आज एक स्ट्रिंगर को जितना मेहनताना दिया जा रहा है उसमें वो सिर्फ एक सप्ताह काम करके दिखा दें तो समझ में आए। अरे पत्थरदिल आकाओं सोचो आखिर 200 रुपए में स्ट्रिंगर खबर कैसे करेगा, जब 70 रुपए लीटर पट्रोल हो गया है साथ ही मोबाइल और अन्य खर्च भी अलग हैं। आकाओं, तुम्हारी इस हरकत पर स्ट्रिंगरों का सिर्फ आंसू ही निकलता है। इसकी आह से तुम सब बच नहीं पाओगे।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





