दिल्ली-एनसीआर से नईदुनिया बंद होने के साथ ही नेशनल दुनिया का प्रकाशन शुरू हो गया है. न कोई शोर-शराबा और ना कोई प्रचार-प्रसार. चुपचाप अखबार का प्रकाशन शुरू कर दिया गया. नईदुनिया से मिलते-जुलते ले आउट के चलते हॉकर भी दुविधा में हैं. बताया जा रहा है कि वे नईदुनिया के जाने और नेशनल दुनिया के आने की खबरों से इतर इसे अपने पाठकों तक नईदुनिया समझकर ही पहुंचा रहा है.
यानी आलोक मेहता एंड कंपनी ने बिना अतिरिक्त प्रयास किए नईदुनिया की जमीन पर नेशनल दुनिया की नींव रख दी है. अखबार का मूल्य साढ़े तीन रुपये रखा गया है. संपादक आलोक मेहता ने पहले पन्ने पर संपादकीय भी लिखी है, जिसका शीर्षक है – वही हैं हम, वही है दुनिया. अखबार के पहले अंक में लखनऊ से योगेश मिश्र, दिल्ली से विनोद अग्निहोत्री, रास बिहार, शिशिधर पाठक, प्रतिभा ज्योति ने बाइलाइन खबरें लिखी हैं.






