नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होने वाले एक विधेयक के जरिए सार्वजनिक प्रसारणकर्ता प्रसार भारती के मुख्य कार्याधिकारी को हटाना आसान हो जाएगा। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि प्रसार भारती कानून में संशोधन के जरिए ऐसा किया जाएगा। पूर्व मुख्य कार्याधिकारी बीएस लाली के मामले में पेश आई समस्याओं के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने यह कदम उठाया है। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद उन्हें निलंबित किया गया था।
अंबिका सोनी ने कहा कि मंत्री समूह, संसदीय स्थायी समिति और शुंगलू समिति ने प्रसार भारती के बेहतर पर्यवेक्षण के लिए कई सुझाव दिए हैं। एक सुझाव यह भी आया है कि उपराष्ट्रपति की अध्यक्षता में एक समिति का गठन हो, जिसमें भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष और सूचना प्रसारण सचिव शामिल हों। यही समिति प्रसार भारती के मुख्य कार्याधिकारी का चयन करे और जरूरत पड़ने पर हटाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून के तहत कोई पर्यवेक्षण नहीं हो सकता। कोई संपर्क नहीं है। इन चीजों को ध्यान में रखकर हमने कुछ संशोधन करने का कदम दठाया और इसका कैबिनेट नोट बनाकर भेजा है।
यह पूछने पर कि क्या कानून में बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मौजूदा कानून मुख्य कार्याधिकारी को काफी अधिक अधिकार देता है और सरकार को लाली को हटाने में खासी दिक्कत पेश आई थी, अंबिका सोनी ने कहा, ‘मैं यही बात कह रही हूं।’ उन्होंने कहा कि शुंगलू समिति ने कहा था कि एक निगरानी समिति बनाई जाए क्योंकि प्रसार भारती बोर्ड में अंतर्कलह है और वह लोगों को अनियमितताओं में कथित रूप से शामिल होने से नहीं रोक पा रहा है। अंबिका सोनी ने कहा कि मंत्रालय पहले अध्यादेश लाने का इरादा कर रहा था लेकिन अब चूंकि संसद का सत्र करीब है इसलिए विधेयक पेश करने की योजना बनाई गई। साभार : एजेंसी






