: कानाफूसी : राष्ट्रीय सहारा पटना के प्रभारी स्थानीय संपादक हरीश पाठक की खुशी महज दो घंटे ही कायम रह सकी. सहारा मैनेजमेंट ने उनके सपने को चकनाचूर कर दिया. सोमवार को करीब पाँच बजे कार्यालय में यह खबर फैली कि पाठक जी का नाम आज से प्रिन्टलाइन में स्थानीय सम्पादक के रूप में जायेगा. सो जश्न तो होना ही था. जश्न की जिम्मेवारी उनके सिपहसलार किशोर केशव ने थाम ली. विभागीय हेड को बोर्ड रूम में बुलाया गया. तालियां बजी और बुके पाठक जी को दिये गये और जमकर डोडा मिठाईयां बंटी.
झारखंड और सीवान संस्करण रुकवाकर उनका नाम प्रिंट लाईन में छापा गया. पाठकजी के करीबी माने जाने वाले जद यूद के एक विधायक जी भी मिठाई लेकर बधाई देने पहुँच गये. विधायक जी की ओर से इस उपलक्ष्य में शहर के एक प्रमुख होटल में दारू पार्टी की भी मंगलवार को व्यवस्था की गयी थी. रात आठ बजे तक पाठक जी के कमरे में चहेतों की बैठक में भावी रणनीति तय किया जाने लगा. तब ही नोएडा से रात 9 बजे आया एक फोन ने खुशियों पर पानी डाल दिया. जिस जोश के साथ उनके नाम को चिपकवाया जा रहा था अब वही लोग उनके नाम हटवा रहे थे. सुबह के संस्करण में उनके नाम न देख बधाई गीत में शामिल चहेतों ने संपादक जी को जब फोन लगाया तो उनका मोबाइल स्वीच आफ मिला.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





