इंदौर। इंदौर में 7 नवंबर को दो अखबारों में एक ही विषय पर केंद्रित दो अलग-अलग खबरें छपी। ‘पीपुल्स समाचार’ में पेज एक पर खबर छपी ‘इंदौर में दो लाख केस पेंडिंग’ जबकि ‘दबंग दुनिया’ में भी पेज एक पर ही पृथ्वी सुरेंद्र सिंह की बाइलाइन खबर छपी थी जिसका शीर्षक था ‘1 करोड़ को फैसले का इंतजार।’
खबर का लब्बोलुआब प्रदेश की हाईकोर्ट व अधीनस्थ कोर्ट में पेंडिंग केस के आंकड़ों थे। इसमें ‘पीपुल्स समाचार’ में इंदौर में 2 लाख केस लंबित होने की जानकारी दी गई थी और जबलपुर को हाईकोर्ट में पेंडिंग केस के मामले में नंबर वन बताया गया था। वहीं ‘दबंग दुनिया’ ने आंकड़ेबाजी में टेबल ड्राफ्टिंग के तीर चलाए वे जो काफी चौंकाने वाले रहे। अखबार ने प्रदेश में 1 करोड़ 11 लाख केस पेंडिंग बताएं है। मजेदार बात यह है कि जून तक प्रदेश की तीनों हाईकोर्ट बेंचों में महज 14 लाख तक ही केस पेंडिंग थे, रहा जिला व निचली अदालतों का मामला तो इंदौर में सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक डेढ़ लाख केस पेंडिंग है। इंदौर में कुल दो लाख केस भी पेंडिंग मान लिए जाएं तो अन्य स्थानों से पूरी उदारता से भी केस पेंडिंग बताए जाएं तो वे 20 लाख से ऊपर भी नहीं जाते हैं।
लेकिन दबंग के रिपोर्टर ‘महाशय’ की महानता देखिए इंदौर में 1 लाख 48 हजार 35 केस पेंडिंग बताएं गए हैं। शेष तीन महानगर भोपाल, जबलपुर, इंदौर के जो आंकड़ें दिए गए हैं वे 1 लाख को भी पार नहीं करते हैं। इसी प्रकार हाईकोर्ट की अधिकृत वेबसाइट पर चुनाव याचिका की संख्या महज 51 है, निचली अदालतों में इंदौर में अधिकतम 100-200 भी मान लें तो शेष स्थानों पर इनसे कम ही होगी। लेकिन अखबार इनकी संख्या बता रहा है 25 हजार। चलो छोड़ो भी हजार के आंकड़ों को मोटे तौर पर प्रदेश में पेंडिंग केस का आंकड़ा 20 लाख भी मान लिया जाएं तो सवाल उठता है कि 91 लाख केस कहां गए? जिनका अखबार में कहीं जिक्र तक नहीं है, इस सवाल का जवाब भी ढूंढ़ा जाना कम मजेदार नहीं होगा। दबंग की खबर में किसी न्यायिक अधिकारी का वर्जन तक नहीं है समझा जा सकता है कि खबर कैसे बनी होगी, जय हो।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





