अमर उजाला प्रबंधन भी अब दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान के नक्शे कदम पर चलते की तैयारी कर रहा है. प्रबंधन अब राज्यों में इन अखबारों की तरह स्टेट हेड बनाने की तैयारी में है. सूत्रों का कहना है कि एक स्टेट हेड या फिर ईस्ट और वेस्ट जोन बनाकर दो स्टेट हेड बनाए जाएं इसको लेकर प्रबंधन माथा-पच्ची कर रहा है. साथ ही स्टेट हेड किस यूनिट में बैठेगा इसको लेकर गहमागहमी है.
अमर उजाला से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कानपुर या लखनऊ या दोनों जगह स्टेट हेड को बैठाने को लेकर विचार किया जा रहा है. यही कारण है कि अब तक कानपुर के संपादक की घोषणा प्रबंधन ने नहीं की है. जबकि यहां संपादक रहे दिनेश जुयाल को नोएडा बुलाकर काम्पैक्ट का प्रभारी बना दिया गया है. पिछले कुछ महीनों में अमर उजाला प्रबंधन ने अपने हाइरार्की में कई बदलाव किए हैं. अमर उजाला में अब तक यूनिट हेड यानी जीएम ही मार्केटिंग, सर्कुलेशन तथा मैनेजमेंट से जुड़े सारे प्रभार देखता था, पर अब यह निर्णय बदल दिया गया है. अब चार से लेकर पांच यूनिटों का एक कलस्टर हेड बना दिया गया है, जिसके पास मार्केटिंग की जिम्मेदारी दे दी गई है. यह हेड ही अब सभी यूनिटों की मार्केटिंग टीम को लीड गरेगा. अब यूनिटों के जीएम के पास मार्केटिंग का प्रभार नहीं रहेगा.
बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने मार्केटिंग डिविजन में बदलाव करने के बाद अब संपादकीय में भी हाइरार्की बदलने की रणनीति बना रहा है. अब अन्य बड़े अखबारों की तर्ज पर अमर उजाला अपने प्रभाव वाले सभी राज्यों में स्टेट हेड की नियुक्ति पर विचार कर रहा है. अमर उजाला से जुड़े एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि प्रबंधन चीजों को और सही ढंग से लागू करने के लिए इस तरह की योजना को अंजाम देने की रणनीति बना रहा है. इसके चलते ही अभी तक कानपुर के संपादक की नियुक्ति नहीं की गई है, क्योंकि इसकी एक बड़ी वजह स्टेट हेड का पद है. उन्होंने संभावना जताई कि प्रबंधन जल्द ही अपनी रणनीति को अंजाम दे देगा. उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा जम्मू के लीडिंग अखबारों में अमर उजाला शामिल है.





