लखनऊ। सत्ता और पॉवर के मद में चूर बृजलाल का किया धरा अब उनके सामने आने लगा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने रेलवे यूनियन के कर्मचारी पर प्रताड़ना के उद्देश्य से दर्ज कराए गए कई केस के मामले में दायर याचिका पर पूर्व एडीजी लॉ एण्ड आर्डर बृजलाल से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। अदालत ने याची की सुरक्षा वापस लिए जाने के मामले में भी उनसे सवाल पूछे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की गई है।
रेलवे विभाग के कर्मचारी नेता सुभाष दुबे की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मतीन व न्यायमूर्ति एसके सक्सेना की खण्डपीठ ने दिया है। सुभाष की ओर से अधिवक्ता वी.के. शाही ने याचिका दायर किया है। याचिका में कहा गया कि रेलवे यूनियन के कर्मचारी सुभाष दुबे ने तत्कालीन महाप्रबन्धक के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। महाप्रबंधन से नजदीकी होने के चलते तत्कालीन मुख्य सुरक्षा आयुक्त बृजलाल ने याची पर अनेक आपराधिक मुकदमे दर्ज करा दिए थे। जांच के बाद सुभाष कई मुकदमों में दोष मुक्त हो गए। जिसके बाद उन्हों ने अपने मौलिक अधिकारों के हनन के खिलाफ याचिका दायर कर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।





