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आवाजाही, कानाफूसी...

संपादक जी को महंगी पड़ सकती है विधायक जी से दोस्‍ती

: कानाफूसी : जदयू विधायक राजीव रंजन के छपास रोग की बीमारी ने एक संपादक को परेशानी में ला खड़ा किया है। खबर है कि राष्ट्रीय सहारा, पटना के संपादक हरीश पाठक को जनता दल युनाइटेड के विधायक राजीव रंजन की दोस्ती ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया है। विधायक राजीव रंजन बिहार के नालंदा जिले के इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वैसे तो उनका सभी अखबार के संपादकों और पत्रकारों से अच्‍छा याराना है, पर पाठक जी से उनकी दोस्‍ती कुछ ज्‍यादा ही है।

: कानाफूसी : जदयू विधायक राजीव रंजन के छपास रोग की बीमारी ने एक संपादक को परेशानी में ला खड़ा किया है। खबर है कि राष्ट्रीय सहारा, पटना के संपादक हरीश पाठक को जनता दल युनाइटेड के विधायक राजीव रंजन की दोस्ती ने उन्हें मुसीबत में डाल दिया है। विधायक राजीव रंजन बिहार के नालंदा जिले के इस्लामपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वैसे तो उनका सभी अखबार के संपादकों और पत्रकारों से अच्‍छा याराना है, पर पाठक जी से उनकी दोस्‍ती कुछ ज्‍यादा ही है।

पाठक जी को भी अपनी दोस्ती का फर्ज तो अदा करना ही था, सो पिछले डेढ़ साल से लगातार विधायकजी की खबर को राष्‍ट्रीय सहारा में प्राथमिकता के साथ प्रकाशित किया। बिहार शरीफ के ब्यूरो को तो साफ निर्देश दे दिया गया था कि विधायक जी चापाकल का भी उद्घाटन करें तो खबर छूटनी नहीं चाहिए। संपादक के इस आदेश को भला कौन टालने वाला था, सो बड़ी से बड़ी खबरें भले ही छूट जाए, विधायक जी की खबर प्राथमिकता से छप रही थी। राष्ट्रीय सहारा का यह रूख स्थानीय नेताओं को नहीं पचा। सो प्रमाण के साथ सहारा श्री को पत्र भेज दिया। पत्र मिलते ही जांच शुरू हो गयी है। जांच के क्रम में पाठक जी ने कम्पनी से मिले स्पष्टीकरण का गोल-मटोल जवाब देकर बचने का प्रयास किया है।

हालांकि सहारा ने इस मामले को गंभीर मसला माना है सो एमसीसी की टीम आने वाली है, बचने के लिए अब पाठक जी अपने आका से मिन्नत करने में जुट गए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि मुंगेर से निकट रहे एक आईपीएस अधिकारी, भागलपुर के एक कांग्रेसी नेता, पटना के एक राज्य सभा सदस्य और पुस्तक प्रकाशन समूह के दो मालिकों के लिए अखबार को इस्तेमाल किये जाने के मामले पर भी जांच होगी। वैसे इसके पीछे यह भी कहा जा रहा है कि पाठक जी की परेशानी का कारण शायद नीतीश कुमार की नाराजगी भी है, क्‍योंकि नीतीश राजगीर में राजीव रंजन के छपास और बयान रोग की बीमारी के लिए फटकार भी लगा चुके हैं। इनको छापने वाले अखबारों पर भी आपत्ति जताई थी।

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