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हिंदुस्‍तान ने कथा शुरू होने से पहले ही छाप डाला बाबा का प्रवचन

: मामला चंदौली जिले का : आज की भागती दुनिया में लोग एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं. कोई शार्ट कट ले रहा है तो कोई दूसरा रास्‍ता अख्तियार कर रहा है. मीडिया जगत में तो एक दूसरे को पीछे छोड़ने तथा एक दूसरे आगे निकलने की होड़ लम्‍बे समय से रही है. पर ऐसा कम देखने को मिलता है कि बुलेट और एक्‍सप्रेस की रफ्तार से टीवी पर भागती खबरों के दौर में कोई अखबार एक दिन आगे होने वाले कार्यक्रम की खबर को पहले ही प्रकाशित कर दे, वो भी महाभारत के संजय स्‍टाइल में वर्णन करते हुए. अब इसे एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ कहें या फिर लापरवाही पर चंदौली जिले में हिंदुस्‍तान अखबार में ऐसा ही हुआ है.

: मामला चंदौली जिले का : आज की भागती दुनिया में लोग एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं. कोई शार्ट कट ले रहा है तो कोई दूसरा रास्‍ता अख्तियार कर रहा है. मीडिया जगत में तो एक दूसरे को पीछे छोड़ने तथा एक दूसरे आगे निकलने की होड़ लम्‍बे समय से रही है. पर ऐसा कम देखने को मिलता है कि बुलेट और एक्‍सप्रेस की रफ्तार से टीवी पर भागती खबरों के दौर में कोई अखबार एक दिन आगे होने वाले कार्यक्रम की खबर को पहले ही प्रकाशित कर दे, वो भी महाभारत के संजय स्‍टाइल में वर्णन करते हुए. अब इसे एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ कहें या फिर लापरवाही पर चंदौली जिले में हिंदुस्‍तान अखबार में ऐसा ही हुआ है.

चंदौली जिले के धानापुर में आठ दिवसीय कथा का कार्यक्रम पांच अप्रैल से शुरू होने वाला था. सभी अखबारों ने इसकी सूचना भी प्रकाशित की थी, पर खराब मौसम के चलते यह कार्यक्रम एक दिन आगे टल गया. यानी कथा पांच अप्रैल की बजाय छह अप्रैल से शुरू करने की योजना बना ली गई. पर हिंदुस्‍तान के स्‍थानीय पत्रकार ने कथा पांच अप्रैल को शुरू नहीं होने के बावजूद इसकी खबर प्रकाशित कर दी. बिल्‍कुल महाभारत के ''संजय'' स्‍टाइल में बाबा जी के भावी कथा को देखते हुए उनसे प्रवचन भी करवा दिया. अब यह उसकी लापरवाही है या गैरजिम्‍मेदाराना रवैया यह तो प्रबंधन ही तय करें.

पर, अगले दिन अखबार में जब बाबा के प्रवचन की खबर प्रकाशित हुई तो दूसरे अखबार वाले सन्‍न हो गए. उनके कार्यालयों से भी खबर छूटने की पड़ताल की जाने लगी तथा हिंदुस्‍तान के पत्रकार की तेजी की सराहना. पर जब भेद खुला तो हर कोई भौचक्‍क रह गया, मालूम करने पर पचा चला कि भागवत कथा तो आज से शुरू होगा, हिंदुस्‍तान ने तो गलत खबर प्रकाशित कर दी है. अब हिंदुस्‍तान के छीछालेदर होने की बारी थी और छीछालेदर हुआ भी. लोगों ने सवाल खड़े किए कि कैसे स्‍थानीय प्रतिनिधि ने बिना मौके पर गए, बिना कथा शुरू होने के तथ्‍यों के बारे में पता लगाए खबर प्रकाशित कर दी. अखबार तथा पत्रकार की विश्‍वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए.

हिंदुस्‍तान में छह अप्रैल को प्रकाशित कथा की खबर

दैनिक जागरण में सात अप्रैल को प्रकाशित कथा की खबर

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