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प्रताड़ना से तंग अमर उजाला, कश्मीर के ब्यूरो चीफ ने की आत्महत्या

अमर उजाला, कश्मीर के ब्यूरो चीफ अशोक राजदान ने स्‍थानीय अखबार प्रबंधन के व्‍यवहार से तंग आकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले चार सालों से कश्मीर में तैनात था। उसका शव बुधवार सुबह अपने कमरे में मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। आरोप लगाया जा रहा है कि वह पिछले छह माह से अपने पारवारिक कारणों के चलते वापस उधमपुर में ट्रांसफर मांग रहा था। लेकिन उसे नहीं किया जा रहा था। इसके लिए उसे तंग किया जा रहा था। जिस कारण उसने आत्महत्या का कदम उठाया।

अमर उजाला, कश्मीर के ब्यूरो चीफ अशोक राजदान ने स्‍थानीय अखबार प्रबंधन के व्‍यवहार से तंग आकर आत्महत्या कर ली। वह पिछले चार सालों से कश्मीर में तैनात था। उसका शव बुधवार सुबह अपने कमरे में मिला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। आरोप लगाया जा रहा है कि वह पिछले छह माह से अपने पारवारिक कारणों के चलते वापस उधमपुर में ट्रांसफर मांग रहा था। लेकिन उसे नहीं किया जा रहा था। इसके लिए उसे तंग किया जा रहा था। जिस कारण उसने आत्महत्या का कदम उठाया।

 
राजदान मूल रुप से उधमपुर जिले का रहने वाला है। वह अमर उजाजा संस्थान में पिछले कई वर्ष से काम कर रहा था। करीब चार साल पहले जब रवेन्द्र श्रीवास्तव को जम्‍मू कश्मीर का संपादक बनाया गया था। तो उस समय आते ही श्रीवास्तव ने अशोक राजदान को उधमपुर से कश्मीर में भेज दिया था। उस समय कहा गया था कि सिर्फ दो सालों के लिए उसे कश्मीर में जाना है। उसे वायदा किया गया था कि प्रमोशन देकर भेजा जाएगा। लेकिन उसकी प्रमोशन ट्रांसफर के करीब एक साल बाद हुई। प्रमोशन के लिए उसने कई पत्र नोयडा में लिखे थे। उसके बाद कंपनी ने उसे सीनियर सब बनाया था।
 
अब तीन साल से ज्यादा समय होने के बाद वह छह माह से अपनी ट्रांसफर मांग रहा था। उसके परिवार में वह अकेला वही कमाने वाला है। पिछले चार सालों से वह परिवार से दूर था। इसलिए वह अपनी वापसी को लेकर संपादक तथा नोयडा में कई पत्र लिख चुका था। जिसमें उसने कहा था कि इन दिनों उधमपुर में जगह खाली है। क्योंकि उधमपुर में तैनात ओम पाल संबयाल का तबादला कुछ माह पहले कठुआ में कर दिया गया है। जिससे जगह खाली थी। लेकिन फिर भी उसकी अर्जी पर कोई गौर नहीं किया जा रहा था।
 
बता दे कि राजदान कई बार जबरदस्ती छुट्टी पर घर आ चुका है। जब जब उसे ज्यादा तंग किया जाता था। तो वह घर आ जाता था। इसके लिए उसे सजा भी कई बार मिल चुकी है। जब सुमेश ठाकुर को कश्मीर में भेजा गया था। तो तब भी वह कई बार तंग आकर जम्‍मू कार्यालय में आकर अपना दुखडा रो चुका था। लेकिन किसी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। इसलिए उसने इन सब कारणों से तंग आकर आत्महत्या का कदम उठा लिया। बताया जा रहा है कि उसने आत्महत्या के लिए एक पत्र भी लिखा है। इस मामले पर जानकारी लेने के लिए तथा मामले को रफा दफा करवाने के लिए आत्महत्या की खबर मिलते ही जम्‍मू कार्यालय से एक अनुभवी अधिकारी को कश्मीर के लिए रवाना कर दिया गया है।
 
इस संदर्भ में अमर उजाला, जम्‍मू के स्‍थानीय संपादक रवेन्‍द्र श्रीवास्‍तव से बात की गई तो उन्‍होंने अशोक राजदान के आत्‍महत्‍या की पुष्टि की तथा प्रबंधन के परेशान करने तथा प्रताड़ना के चलते आत्‍महत्‍या की खबर को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्‍होंने कहा कि यह अभी जांच का विषय है कि अशोक ने किन कारणों से आत्‍महत्‍या की है, सीधा प्रबंधन और संस्‍थान पर आरोप लगाना उचित नहीं है। 
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