उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच के मिहींपुरवा ब्लाक के अमर उजाला संवाददाता सुधीर मदेशिया को अब तक न्याय नहीं मिला है. पुलिस विभाग और प्रशासन द्वारा द्वेषवश मुक़दमे में फंसाने की कार्रवाई में अभी भी न्याय का इंतज़ार है. पिछले वर्ष 7 अक्टूबर को इसी मिहींपुरवा कस्बे में हुए एक साम्प्रदायिक उपद्रव में पत्रकार होने के कारण घटना कवर करने गए सुधीर को इस घटना में आगज़नी और तमाम तोड़-फोड और लूट की घटनाओं में प्रशासन ने चिन्हित कर लिया. सुधीर खबर लिखने के कारण पहले से ही कुछ ताकतवर लोगों और पुलिस के निशाने पर था. इसके बाद सुधीर पर एक साथ तीन एफआईआर दर्ज हुई जिसमें एक तो तत्कालीन मोतीपुर थानाध्यक्ष के द्वारा स्वयं वादी के रूप में दर्ज कराइ गई थी.
इस पूरे मामले में अपने ऊपर हुए अन्याय से आहत पत्रकार सुधीर मदेशिया ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया में भी शिकायत की थी. प्रेस काउंसिल से 2 दिसंबर 2011 को शिकायत किये जाने के उपरांत 28 जनवरी 2012 के पत्र द्वारा सुधीर मदेशिया को अवगत कराया कि आपके मामले में उत्तर प्रदेश शासन को लिखित वक्तव्य के लिए नोटिस जारी किया जा रहा है और जैसे कोई वक्तव्य प्राप्त होगा तो सूचना उन तक पहुंचाई जायेगी. परन्तु 28 जनवरी बीते 2 माह से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बाद भी आज तक कोई जवाब नहीं आया और ना ही कार्रवाई आगे बढ़ी.
प्रेस काउंसिल से भी न्याय मिलने में हो रही देरी के कारण इस पत्रकार के लिए कार्य करना भी कठिन हो रहा है. करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जिले में अमर उजाला के संवाददाता है. वे अमर उजाला की लांचिंग के समय से ही जुड़े हुए हैं. इनके पिता दिलीप मदेशिया भी जिले में करीब 11 वर्षों से अधिक समय से हिन्दुस्तान के संवाददाता हैं. कस्बों के पत्रकारों की लगातार कम होती ताकत के बीच अगर इस प्रकार पत्रकार के उत्पीड़न पर कोई न्याय की कार्रवाई नहीं हुई तो फिर यह पत्रकारिता का मनोबल को गिराने वाले कार्य के रूप में लिया जाएगा.







