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हमले के शिकार पत्रकार आनंद मिश्र के साथ गृहमंत्री पहुंचे दादर स्‍टेशन

: पैदल लिया घटनास्‍थल का जायजा, आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया : मुंबई : ‘नवभारत टाइम्स’ के वरिष्ठ संवाददाता आनंद मिश्र के साथ बदसलूकी की शिकायत लेकर पत्रकारों का समूह शुक्रवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटील से शिकायत करने पहुंचा। विधानभवन में पाटील के कक्ष में भरे पत्रकारों को तब इतनी ताबड़तोड़ कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी, जो कि पाटील ने तय कर रखी थी। उन्होंने नाराज पत्रकारों को सुना और कुछ ही मिनट में निर्णय ले लिया कि वे खुद दादर के उस इंस्टीट्यूट का दौरा करेंगे।

: पैदल लिया घटनास्‍थल का जायजा, आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया : मुंबई : ‘नवभारत टाइम्स’ के वरिष्ठ संवाददाता आनंद मिश्र के साथ बदसलूकी की शिकायत लेकर पत्रकारों का समूह शुक्रवार को महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटील से शिकायत करने पहुंचा। विधानभवन में पाटील के कक्ष में भरे पत्रकारों को तब इतनी ताबड़तोड़ कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी, जो कि पाटील ने तय कर रखी थी। उन्होंने नाराज पत्रकारों को सुना और कुछ ही मिनट में निर्णय ले लिया कि वे खुद दादर के उस इंस्टीट्यूट का दौरा करेंगे।

बस, पाटील की सरकारी एम्बेस्डर ‘एनबीटी’ के पत्रकार आनंद मिश्र को लेकर उस जगह के लिए निकल पड़ी, जहां एक दिन पहले उनके साथ धक्का-मुक्की की गई थी और कुछ समय बंधक बनाकर डराया-धमकाया गया था। वे पश्चिम और मध्य रेल लाइनों के बीच बने रेलवे इंस्टीट्यूट पहुंच गए, जहां एक दिन पहले पत्रकार को जान से मार देने की धमकी दी गई थी। इसके साथ ही दादर स्टेशन का निरीक्षण एक ऐसे स्थान से शुरू हुआ जिसने पुलिस, रेलवे और जीआरपी की मिलीभगत की परतें उघाड़कर रख दीं।

बिना किसी सुरक्षा के गृह मंत्री दादर में फूल बाजार से लगे उस पैदल पुल पर पहुंच गए, जिस पर फेरीवालों का राज है। उनके पहुंचते ही भीड़ भरे एफओबी को घेरे खड़े फेरीवालों के बीच हंगामा मच गया। आबा (आरआर पा‍टील) ने दादर के सभी रेलवे पुलों को दो घंटे के भीतर फेरीवालों से मुक्त करने का निर्देश कमिश्नर अरूप पटनायक को फोन पर दे डाला। फिर बंद पड़ी कैंटीन के मालिक केणी को गृह मंत्री के सवालों से दो-चार होना पड़ा। मामला घुमाने की केणी की कोशिश बेकार गई और उनकी गिरफ्तारी का आदेश हो गया। इतने पर भी गृह मंत्री संतुष्ट नहीं हुए और पहुंच गए दादर पुलिस स्टेशन, जहां पत्रकारों को एक एफआईआर दर्ज कराने में चार घंटे लग गए थे। सिर्फ नाम के लिए ‘आरोपी’ बनाकर खड़े किए गए स्कूली बच्चों को पाटील ने मुक्ति दिलाई और असली आरोपियों को पकडऩे का आदेश दे डाला।

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