: कानाफूसी : अपने कर्मचारियों से बांड भरवा रहा है स्टार समूह! : आनंद बाजार पत्रिका और स्टार न्यूज के संयुक्त साझेदारी वाले मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशंस सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एमसीसीएस) के बीच करार टूटने की संभावना अब बलवती होती जा रही हैं. बताया जा रहा है कि स्टार समूह ने अब अपने आपको इस संयुक्त उद्यम से अपने को अलग करने की तैयारी कर चुका है. स्टार न्यूज में कार्यरत कर्मचारियों से स्टार समूह एक बांड साइन करवा रहा है, जिसके तहत वे लोग स्टार न्यूज चैनल बंद होने के बाद भी अगले डेढ़ साल तक किसी दूसरे चैनल में काम नहीं करेंगे.
बताया जा रहा है कि यह बांड अभी वरिष्ठों से भरवाया जा रहा है. वरिष्ठ अपनी जुबान नहीं खोल रहे हैं, जिससे यह खबर आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हो पा रही है. पर चर्चा है कि धीरे-धीरे ये बांड मध्यम एवं निचले स्तर के कर्मचारियों से भी भरवाया जाएगा, जिसके अनुसार वे किसी भी दूसरे चैनल में काम नहीं कर सकेंगे. काफी समय से आनंद बाजार पत्रिका और स्टार समूह के बीच संपादकीय तथा कई अन्य रणनीतिक मामलों को लेकर मतभेद गहरा चुका है. और माना जा रहा है कि दोनों कंपनियां अपने को संयुक्त इकाई एमसीसीएस से अलग कर लेंगे. फारेन इनवेंस्टमेंट पॉलिसी के तहत आनंद बाजार पत्रिका समूह (एबीपी) स्टार की हिस्सेदारी खरीद लेगी.
2003 में स्थापित एमसीसीएस में एबीपी की 76 फीसदी तथा स्टार की 24 फीसदी हिस्सेदारी है. एमसीसीएस के तहत तीन न्यूज चैनलों स्टार न्यूज, स्टार आनंद और स्टार माझा का प्रसारण होता है. खबर है कि फारेन इनवेस्टमेंट पालिसी के तहत एबीपी स्टार समूह पर डेढ़ साल का गैर प्रतिस्पर्धी शर्त लगा सकती है, जिसके तहत स्टार समूह अगले 18 महीनों में भारत में ना तो अपना चैनल लांच कर सकता है, ना ही किसी प्रतिस्पर्धी समूह से समझौता कर सकता है. यानी उसे इन अठारह महीने भारत में चैनल संचालन से खुद को दूर रखना पड़ेगा.
सूत्रों का कहना है कि के टॉप न्यूज चैनलों में शामिल तथा ब्रांड बन चुका स्टार न्यूज इन डेढ़ सालों तक चुप बैठने के बाद अपने पुराने कर्मचारियों के साथ ही मार्केट में उतरने की रणनीति बना रहा है. इसी से यह बांड भरवाया जा रहा है. चैनल संचालन न होने की दशा में कर्मचारी इन अठारह महीने अपने घर पर बैठे रहेंगे. पर इससे उनको आर्थिक नुकसान नहीं होगा. स्टार समूह इस बांड के अनुसार सभी को इस दौरान नियमित वेतन प्रदान करता रहेगा. जैसे ही गैर प्रतिस्पर्धी शर्त की सीमा समाप्त होगी स्टार न्यूज को फिर लांच कर दिया जाएगा. इससे कंपनी को अपने ब्रांड नेम पर कुछ ज्यादा मेहनत और खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
जब एबीपी और स्टार समूह अलग होंगे तो आनंद बाजार समूह को अपने चैनलों के नाम बदलने पड़ेंगे. जबकि उनके स्वामित्व वाला स्टार न्यूज एवं दो अन्य चैनल देश में ब्रांड बन चुके हैं. नया ब्रांड स्थापित करने में एबीपी ग्रुप को मशक्कत करनी पड़ेगी, जबकि स्टार अपने पुराने ब्रांड नेम को फिर से भुनाने की तैयारी में है. कहा जा रहा है कि गैर प्रतिस्पर्धी शर्त की सीमा समाप्त होते ही वो घरेलू बाजार में किसी दूसरे समूह से समझौता करके स्टार न्यूज को फिर से भारत में लांच कर देगा, जिससे उसे अपने ब्रांड नेम को स्थापित करने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी. और इस बांड के अनुसार उसके पुराने कर्मचारी फिर से स्टार न्यूज के लिए काम करते नजर आएंगे.
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