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सीएनईबी भी लाइव इंडिया के नक्‍शेकदम पर, जल्‍द बंद होने की चर्चाएं

 धूम-धड़ाके के साथ शुरू हुआ एक और चैनल अंत की ओर जाने की तैयारी में दिख रहा है. यहां बात हो रही है सीएनईबी चैनल की. बताया जा रहा है कि चैनल की आर्थिक हालत खस्‍ता हो चुकी है. छोटी-छोटी चीजों में कटौती की जा रही है. कम बिजली जलाने का निर्देश दिया जा रहा है. चैनल लगातार घाटे में चल रहा है. अनुरंजन झा के जाने के बाद आए रजनीश भी चैनल का कोई उद्धार नहीं कर पाए हैं. उन्‍होंने अपनी महंगी टीम भरकर प्रबंधन का खर्च तो बढ़ा दिया, परन्‍तु चैनल को उसके सापेक्ष बिजनेस नहीं दिला सके.

 धूम-धड़ाके के साथ शुरू हुआ एक और चैनल अंत की ओर जाने की तैयारी में दिख रहा है. यहां बात हो रही है सीएनईबी चैनल की. बताया जा रहा है कि चैनल की आर्थिक हालत खस्‍ता हो चुकी है. छोटी-छोटी चीजों में कटौती की जा रही है. कम बिजली जलाने का निर्देश दिया जा रहा है. चैनल लगातार घाटे में चल रहा है. अनुरंजन झा के जाने के बाद आए रजनीश भी चैनल का कोई उद्धार नहीं कर पाए हैं. उन्‍होंने अपनी महंगी टीम भरकर प्रबंधन का खर्च तो बढ़ा दिया, परन्‍तु चैनल को उसके सापेक्ष बिजनेस नहीं दिला सके.

खबर है कि यह चैनल बिल्‍कुल लाइव इंडिया और वॉयस ऑफ इंडिया की हालत में पहुंचता दिख रहा है. पिक अप और ड्रापिंग तो पहले ही बंद कर दी गई थी. अब खबर है कि रिपोर्टरों के लिए भी गाड़ी नहीं भेजी जा रही है. यहां वहां से विजुअल और खबरों का जुगाड़ किया जा रहा है, या फिर स्ट्रिंगरों के खबरों के सहारे काम चलाया जा रहा है. राहुल देव के नेतृत्‍व में चैनल ठीक ठाक चल रहा था कि प्रबंधन ने अनुरंजन को चैनल का सर्वेसर्वा बना दिया, जिससे राहुल देव को जाना पड़ा.

अनुरंजन ने जिम्‍मेदारी हाथ में आते ही पुराने लोगों को खंगाल कर इंडिया न्‍यूज तथा अन्‍य चैनलों के अपने खास लोगों को बड़े पैकेज पर भरना शुरू कर दिया. इस दौरान चैनल की आमदनी अठन्‍नी और खर्चा एक रुपया हो गया. भारी भरकम सेलरी पर स्‍टाफ रखे गए पर मार्केटिंग के फील्‍ड में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई. प्रबंधन ने जब नुकसान देखा तो अनुरंजन के साथ अपना रिश्‍ता खत्‍म कर लिया. अनुरंजन को भी राहुल देव की तरह यहां से विदा लेना पड़ा.

इसके बाद प्रबंधन आईबीएन7 से रजनीश को लेकर आया. शुरुआती दौर में रजनीश ने कुछ बेहतर करने की कोशिश की. बुलेटिनों में कुछ बदलाव किए, पर यह बुझने से पहले भभकते दीपक की लौ साबित हुआ. अनुरंजन के जाने के बाद उनके कुछ खास लोग या तो खुद रास्‍ता ढूंढ लिया या फिर निकाल दिए गए. बचत के नाम पर कटौती की गई, परन्‍तु नए बॉस फिर अपने कुछ खास लोगों को लेकर आए, ठीक उसी तरह जैसा आजकल चलन में है. पर यहां भी आमदनी कम और खर्च ज्‍यादा होने लगा, जिसके चलते मुश्किलें आनी शुरू हो गईं.

खबर है कि कास्‍ट कस्टिंग के नाम पर प्रबंधन ने खर्चों में कटौती करनी शुरू की. कुछ लोगों को निकाला भी गया, फिर भी आमदनी और खर्च बराबर नहीं हो पाया. हाल के दिनों में न्‍यूज रूम से आधे से ज्‍यादा लोगों की विदाई हो चुकी है. खर्च कटौती के लिए ज्‍यादातर ब्‍यूरो को बंद कर दिया गया है. इसी महीने आधा दर्जन लोगों को बाहर किया जा चुका है. कहा जा रहा है कि और भी लोग निकाले जाएंगे. लाइब्रेरी से भी पिछले दिनों तीन लोगों को निकाला गया था, अब एक कर्मचारी ही बचा है. लाइव इंडिया से दो लोगों को लाइब्रेरी में बुलाया गया. और इन लोगों को चारों से अधिक सेलरी दी जा रही है.

इस संदर्भ में जब सीएनईबी के मालिक अमनदीप सरान से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्‍वीच ऑफ मिला. चैनल हेड रजनीश ने इस संदर्भ में बताया कि सब अफवाह हैं कहीं चैनल बंद होने नहीं जा रहा है. केवल खर्चे कम करने के लिए कास्‍ट कटिंग की जा रही है, साथ ही फालतू खर्चे रोके जा रहे हैं. 


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