बड़ी चर्चा थी कि नवभारत टाइम्स का जाने कहां कहां से प्रकाशन होगा, विस्तार होगा, मेरठ से लेकर लखनऊ, कानपुर, पटना, रांची, रायपुर आदि जगहों से प्रकाशन होगा, भरपूर नौकरियां मिलेगी, ढेरों नए लोग संपादक बनेंगे…. पर यह प्लान सिर्फ प्लान बनकर ही रह गया. नभाटा प्रबंधन ने विस्तार की योजनाओं को कैंसल कर दिया. इसलिए किया कि इन जगहों पर रेवेन्यू नहीं है और अखबार प्राफिट में नहीं आ पाएगा. यह गुणा गणित प्रबंधन को उनकी इंटरनल और आउटर एजेंसीज ने सर्वे आदि के बाद बताया है.
इन जगहों पर अखबार निकालना और उसे नंबर वन बनाने में जितना खर्चा होगा, जितना टाइम लगेगा, उसकी भरपाई में दशक भर से ज्यादा वक्त लग जाएगा और यह भी गारंटी नहीं कि नंबर वन बन ही पाएगा अखबार. अगर अखबार नंबर वन या टू नहीं हो पाया तो लोकल रेवेन्यू भी हाथ नहीं लगने वाला. कुल मिलाकर बनियागिरी के इसी गुणा भाग के आधार पर नभाटा प्रबंधन ने अखबार के विस्तार की योजनाओं को ठंढे बस्ते में डाल दिया है. रामकृपाल सिंह समेत ढेर सारे लोगों के मंसूबों पर पानी फिर गया जो नए एडिशन्स के जरिए पत्रकारिता में कुछ नया करने रचने के लिए उत्साहित थे.





