अप्रैल और मई का महीना पत्रकारों के लिए भारी पड़ने वाला है. खबर है कि बसपा के शासनकाल में जोर-शोर से चलने वाला जनसंदेश चैनल, जिसका नाम बदलकर न्यूज टाइम किया गया, अब बंद होने वाला है. इस चैनल के संपादक सैयदेन जैदी ने सभी को नई नौकरी ढूंढ लेने को कह दिया है. इसके बाद से चैनल में काम करने वाले पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारी परेशान हैं. चैनल की आर्थिक स्थिति अत्यन्त दयनीय हो चुकी है. बाबूलाल कुशवाहा एंड कंपनी के एनआरएचएम घोटाले की चपेट में आने के बाद से ही इस चैनल की हालत पतली होने लगी थी.
पिछले दिनों बसपाई चैनल का ठप्पा हटाने के लिए चैनल का नाम भी जनसंदेश से बदलकर न्यूज टाइम किया गया, फिर भी ये टोटका काम नहीं आया. बसपा के शासनकाल में छोटे सेटअप के बावजूद चैनल ठीक ठाक चल रहा था. इसके मालिकान को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं रहीं. कभी इस चैनल को बाबूलाल कुशवाहा का बताया गया तो कभी इसे उनके खास एमएलसी रामचंद्र प्रधान का, अब जब दोनों लोग एनआरएचएम के चपेट में हैं तो चैनल भी डगमगाने लगा है.
पिछले दिनों चैनल से कई लोगों को अचानक कार्यमुक्त कर दिया गया. इसके बाद से ही इस चैनल के बंद होने की चर्चाएं होनी शुरू हो गई थीं. कई कर्मचारी चैनल के अंदर की हालात को देखकर दूसरे चैनलों में चले गए. इस संदर्भ में जब सैयदेन जैदी से बात की गई थी, तो उन्होंने इसको अफवाह बताया था. साथ ही कहा था कि किसी को निकाला नहीं गया है, जिसको मौका मिल रहा है वो चला जा रहा है. हम किसी को रोक नहीं रहे हैं. हालांकि चैनल से जाने वालों ने कहा था कि उनकी छंटनी की गई है.
खैर, अब ताजा सूचना है कि मई माह में चैनल पर ताला लगा दिया जाएगा. इसके चलते ही ज्यादा लोगों को पहले ही निकाल दिया गया. अब बस उन्हीं लोगों को रखा गया है, जिनसे चैनल को मई तक चलाया जा सके. कर्मचारी परेशान हैं, जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उस तरह की स्थिति में वे नई नौकरी को लेकर परेशान हैं. कई चैनलों में कास्ट कटिंग की जा रही है. चैनल के बंद होने की खबर के संदर्भ में जब चैनल हेड सैयदेन जैदी को कॉल किया गया तो उन्होंने फोन पिक नहीं किया, जिससे उनका पक्ष सामने नहीं आ सका.





