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आखिर इन्‍होंने लिख ही डाली अखिलेश यादव पर किताब

दिल्ली के प्रसिद्ध प्रकाशक डायमंड बुक्स ने उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर अब तक की पहली पुस्तक 'नयी उम्मीदों का युवराज : अखिलेश यादव' छाप दी है, आपको याद होगा भड़ास ने कुछ ही दिन पहले बताया था कि अब उत्तर प्रदेश के लेखकों में देश के सबसे नए विषय पर लिखने की होड़ लगी है. बाजी मारी है जाने-माने बुजुर्ग लेखक यज्ञदत्त शर्मा (86) और लखनऊ के एक युवा लेखक अविजित सूर्यवंशी (31) ने, उन्होंने डायमंड बुक्स के लिए यह पुस्तक का करार केवल एक महीने में पूरा कर दिखाया.

दिल्ली के प्रसिद्ध प्रकाशक डायमंड बुक्स ने उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर अब तक की पहली पुस्तक 'नयी उम्मीदों का युवराज : अखिलेश यादव' छाप दी है, आपको याद होगा भड़ास ने कुछ ही दिन पहले बताया था कि अब उत्तर प्रदेश के लेखकों में देश के सबसे नए विषय पर लिखने की होड़ लगी है. बाजी मारी है जाने-माने बुजुर्ग लेखक यज्ञदत्त शर्मा (86) और लखनऊ के एक युवा लेखक अविजित सूर्यवंशी (31) ने, उन्होंने डायमंड बुक्स के लिए यह पुस्तक का करार केवल एक महीने में पूरा कर दिखाया.

यज्ञदत्त शर्मा पुराने ज़माने की शैली में काम करते हैं सो उन्होंने अखिलेश यादव के जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं पर काम किया और अविजित ने समूची पुस्तक को भाषा दी. बुजुर्ग को सम्मान देने के लिए अविजित ने यज्ञदत्त शर्मा का नाम प्रकाशक से आग्रह करके पहले दिया. अंग्रेज़ी में यह पुस्तक बाज़ार में जा चुकी है नाम है, The Lord of New Hopes : Akhilesh Yadav. हिंदी में यह पुस्तक प्रसिद्द अकथा लेखक तथा अनेक पुस्तकों के लेखक अशोक कुमार शर्मा द्वारा रूपांतरित की गयी है. डायमंड बुक्स इस पुस्तक को दस भारतीय भाषाओँ में छाप रही है.

अविजित कुछ समय तक दिल्ली में क्रिकेट टुडे और डायमंड बुक्स के लिए अंग्रेज़ी में संपादन का काम करते थे. पिता की मृत्यु के बाद वे लखनऊ में ही अपने पारिवारिक व्यवसाय को संभाल रहे थे. युवाओं और करंट अफयेर्स पर लिखना उनका शौक है. 'नयी उम्मीदों का युवराज : अखिलेश यादव' में 14 अध्याय हैं. लगभग 200 पृष्ठों की इस पुस्तक में समाजवादी पार्टी के जन्म, नए अवतार, अखिलेश के स्कूल-कालेज इन्जीनियार्रिंग के दिनों और मित्रों, उनकी पसंद नापपसंद, विवाह, पिता के साथ रिश्तों, राजनीति में आगमन, साइकिल रैलियां, क्रांति रथ यात्रा, सभाओं, राहुल गाँधी और कांग्रेस के मुकाबले स्थिति सुधरने तथा सत्ता में आने तक के रोचक विवरण सचित्र रूप से दिए गए हैं. डायमंड बुक्स के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नरेंद्र वर्मा ने भड़ास को बताया, 'हम फिलहाल इस पुस्तक की 50 हज़ार प्रतियां छाप रहे हैं.'

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