Girish Pankaj : हिंदी पत्रकारिता का पतन तो साफ़ नज़र आ रहा है, मगर यह इतनी गिर जायेगी, कल्पना नहीं थी. दिल्ली से निकलने वाली एक समाचार पत्रिका के नए अंक में महिलाओं के उभारों पर केन्द्रित एक अंक निकलना है. आवरण पर अश्लील चित्र चस्पा किया और लिखा है ''उभार की सनक'' यह पत्रिका इसके पहले भी अश्लीलता की हदें पार करने वाले विशेषांक निकलती रही है. समझ नहीं आता कि ऐसे अश्लील अंक निकालने के बाद इनके मालिक अपने घर में अपनी अपनी बीवी, पिता, माँ, अपनी बहन का किस तरह सामना करते होंगे?. बाजारवाद का जय, जिसने नैतिकता के प्रश्न को निकाल बाहर कर दिया है.

गिरीश पंकज के फेसबुक वॉल से साभार.





