Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

क्या काटजू लाल को उनके ‘हसीन सपने’ में राष्ट्रपति भवन नज़र आ रहा है? (पार्ट तीन)

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लगाम कसने के जस्टिस मार्कंडेय काटजू के इरादों को लोग बेशक पागलपन मान रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बेहद सोचा-समझा और मौके पर उठाया कदम मान रहे हैं। बताया जाता है कि छोटे कद के जस्टिस काटजू अब छोटी-मोटी कुर्सी से संतुष्ट नहीं हैं और उनका सपना राष्ट्रपति भवन की तरफ कूच करने का है।

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लगाम कसने के जस्टिस मार्कंडेय काटजू के इरादों को लोग बेशक पागलपन मान रहे हों, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बेहद सोचा-समझा और मौके पर उठाया कदम मान रहे हैं। बताया जाता है कि छोटे कद के जस्टिस काटजू अब छोटी-मोटी कुर्सी से संतुष्ट नहीं हैं और उनका सपना राष्ट्रपति भवन की तरफ कूच करने का है।

देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का कार्यकाल 25 जुलाई को पूरा हो रहा है और अब कोई भी पार्टी उन्हें रिपीट करने के मूड में नहीं दिख रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बारे में कांग्रेस की ओर से 10 मई के बाद औपचारिक बातचीत शुरू की जाएगी जिसमें संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा की जाएगी। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता आम बजट पारित कराने की है और वित्त विधेयक को पारित कराने के लिए 8 मई की तारीख तय की गई है।
 
फिलहाल जो संवैधानिक स्थिति है उसके मुताबिक कोई भी राजनीतिक पार्टी अपने दम पर किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति की कुर्सी पर बिठाने की स्थिति में नहीं है। साफ है कि यूपीए और एनडीए दोनों के नेता जिस उम्मीदवार के नाम पर एकजुट होंगे वो ही अगला राष्ट्रपति बनेगा। अभी तक सभी राजनीतिक दल अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवारों की सूची तैयार करने और उन नामों के समर्थकों की संख्या पर गुना-भाग करने में ही जुटे हैं।

अन्ना और रामदेव के आंदोलनों ने साबित कर दिया है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों का प्रभाव इन नेताओं के निजी वोटबैंक से ज्यादा असरदार और आक्रामक है। संसद में सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बेशक कीचड़ उछालने में जुटे हों, लेकिन कम से कम दो विषयों के विरोध पर सभी के विचारों में समानता है। ये दोनों विषय हैं- पहला अन्ना और दूसरा उनके आंदोलन को पंख देने वाले सोशल नेटवर्किंग साइट।

मुलायम हों, ममता हों या मायावती, जिनके भी हाथों में राष्ट्रपति भवन की चाबी है सब को हर तरह के मीडिया की परवाह है। इन सब नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस और बीजेपी पहले ही सोशल नेटवर्किंग परेशान रह चुके हैं। कभी किसी नेता का किस्सा आ खड़ा होता है तो कभी किसी का। चैनल और अखबार के रिपोर्टर, संपादक और मालिक तक तो मैनेज किए जा सकते हैं, लेकिन सोशल नेटवर्किंग साइटों पर न कोई संपादक होता है और न रिपोर्टर। सबको आज़ादी है, लेकिन आम आदमी के इस अधिकार पर सारे नेताओं को ऐतराज़ है।

बताया जाता है कि ऐसे में काटजू के एक करीबी मित्र ने उन्हें शिगूफ़ा दे दिया कि अगर वे किसी तरह इस समुद्र को बांधने में कामयाब हो जाएंगे तो उनका नाम देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए नामित हो सकता है। बस फिर क्या था? नीतीश, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, यूपी, दिल्ली सब का मुद्दा छोड़ कर पिल पड़े सोशल नेटवर्कों के पानी को बटोरने की कोशिश में। बाकायदा मंत्री जी को पत्र लिखा गया। ख्वाब देखने लगे कि कानून भी बनवा देंगे और इसी सीढ़ी पर चढ़के राष्ट्रपति की कुर्सी पर भी पहुंच जाएंगे। देखें काटजू जी के हसीन सपने कितने परवान चढ़ते हैं?

लेखक धीरज भारद्वाज कई चैनलों अखबारों में काम कर चुके हैं. मीडिया दरबार डाट काम के माध्यम से न्यू मीडिया में अलख जगा रहे हैं.

tag-  katju ki kitkit

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...