नईदुनिया के बिकने के बाद वहां की व्यवस्था बिगड़ती नजर आने लगी है. इस अखबार को ब्रांड बनाने वाले पुराने लोग अब इससे किनारा करने लगे हैं. सबसे पहले नईदुनिया के ग्रुप एडिटर उमेश त्रिवेदी ने नईदुनिया से इस्तीफा दिया था, अब इंदौर के एसोसिएट एडिटर हेमंत पाल ने भी प्रबंधन को इस्तीफ़ा सौप दिया है. खास बात यह रही कि अंदर की अव्यवस्था से नाराज हेमंत पाल ने एक महीना का नोटिस देने की बजाय एक महीने का वेतन जमा करके इस्तीफा दे दिया.
उन्होंने प्रबंधन को अपने इस्तीफा देने का कारण तो नहीं बताया परन्तु माना जा रहा है कि जागरण प्रबंधन जिस नॉन प्रोफेशनल तरीके से अखबार चलाना चाहता है, उससे वो नाराज थे. नईदुनिया अब कॉकटेल बनता जा रहा है. नईदुनिया की मध्य प्रदेश मे एक संस्कारित पत्रकारिता की पहचान रही है, उसे जागरण वाले अपने तरीके से ट्रीट कर रहे हैं तो श्रवण गर्ग भास्कर वाले अंदाज में अखबार को लाने की कोशिश कर रहे हैं, लिहाजा आंतरिक स्थितियां खराब होती जा रही हैं.
हेमंत पाल एमपी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. पिछले ढाई दशक से ज्यादा समय उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता को दिया है. वे १९८६ में नईदुनिया के टैलेंट हंट से इस अखबार में आए थे. बाद में पांच साल जनसत्ता, मुंबई में भी रहे. 1995 में इन्होंने नईदुनिया से दूसरी पारी शुरू की तब से यहीं थे. ये नईदुनिया के लिए भोपाल में पॉलिटिकल और प्रशासन प्रभारीभी रह चुके हैं. संभावना जताई जा रही है कि ये जल्द ही किसी समूह से जुड़ने वाले हैं. दूसरी तरफ आंतरिक स्थितियों से नाराज कुछ और वरिष्ठों के इस्तीफा देने की संभावना है.





