: कानाफूसी : टेलीविजन न्यूज इंडस्ट्री के सबसे बड़े खिलाडि़यों में से एक टीवी टुडे समूह को लेकर चल रही चर्चाओं से काम करने मीडियाकर्मियों के होश उड़े हुए हैं. टीवी टुडे समूह से खबर आ रही है कि इस समूह अपने खर्च में कटौती करने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए बड़ी छंटनी की लिस्ट तैयार की जा रही है. समूह के चारों चैनल आजतक, हेडलाइंस टुडे, तेज और दिल्ली आजतक से एक मुश्त ढाई से तीन सौ लोगों को बाहर करने की तैयारी चल रही है. इसमें एडिटोरियल समेत सभी विभागों के लोग शामिल होंगे.
कहा जा रहा है कि टीवी टुडे समूह अब अपने खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है. पिछले कुछ सालों में समूह का शुद्ध लाभ कम हुआ है, जिसके चलते चैनल कास्ट कंटिंग की तैयारी कर रही है. इसके लिए छंटनी की लिस्ट तैयार की जा रही है. इसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जा रहा है, जो समूह के हिसाब से नॉन प्राफिटेबल एसेट्स हैं. इनमें सीनियर और जूनियर सभी शामिल किए जाएंगे. एडिटोरियल, पीसीआर, एमसीआर, मार्केटिंग, एडिटिंग, आईटी, कैमरा समेत सभी सेक्शन से एक अनुपात में लोग बाहर होंगे. कंपनी कर्मचारियों के साथ कोई बेइमानी नहीं करेगी. नियमानुसार इन्हें पेमेंट करने के बाद ही नमस्कार किया जाएगा.
सूत्रों का कहना है कि कंपनी की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, इसके चलते ही टीवी टुडे समूह आदित्य बिड़ला समूह के अपने 26 प्रतिशत शेयर बेचने की तैयारी में लगा हुआ है. हालांकि कुछ अन्य कंपनियों से भी बातचीत चलने की जानकारी मिल रही है. कंपनी अपने 26 फीसदी शेयर तीन सौ करोड़ रुपये में बेचने की तैयारी कर रही है. आपको बता दें कि टीवी टुडे का शुद्ध लाभ लगातार घट रहा है. वित्तीय वर्ष 2011 में कंपनी को केवल 12 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था. लगातार घटते लाभ के चलते ही सीईओ जी कृष्णन को समूह से जाना पड़ा था.
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2011 में टीवी टुडे ग्रुप का टर्न ओवर 292 करोड़ का था, जिसमें खर्च काटने के बाद मात्र बारह करोड़ रुपये का लाभ हुआ है. पिछले साल इस ग्रुप ने केवल डिस्ट्रीब्यूशन पर 84 करोड़ रुपये खर्च किए. सेलरी के मद में भी कंपनी औसतन 85 से 90 करोड़ सालाना खर्च करती है. पे चैनल और रीच मार्केट अधिक होने के बाद भी ग्रुप का शुद्ध लाभ लगातार घटता जा रहा है. 2009 में कंपनी को 32 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था वहीं 2010 में घटकर 18 करोड़ रह गया था. टीवीटुडे नेटवर्क में अरुण पुरी वाली कंपनी लीविंग मीडिया का करीब 57 प्रतिशत शेयर है और इसी के पास मालिकाना हक है. लिविंग मीडिया का काम प्रिंट मीडिया के अलावा थॉमसन प्रेस का संचालन है.






