दिल्ली। प्रतिष्ठित कथाकार एवं हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव ने लमही पत्रिका के कहानी एकाग्र अंक का अपने आवास पर लोकार्पण किया। राजेन्द्र यादव ने लमही के इस विशेषांक को ऐतिहासिक घटना के रूप में रेखांकित किया। उन्होने कहा कि पिछले दिनो कई पत्रिकाओं ने हिंदी कहानी की नई रचनाशीलता पर अंक निकाले हैं। उन सबके बीच लमही का यह अंक विशेष है। प्रेमचंद यथार्थ को देखने की जिस दृष्टि के पक्षधर थे, उसका विकास इस अंक में हुआ है।
राजेन्द्र यादव ने इस अंक के अतिथि संपादक सुशील सिद्धार्थ और लमही के प्रधान संपादक विजय राय को शुभकामनाएं प्रदान की। विजय राय ने अपने संबोधन में कहा कि लमही किसी प्रकार की गुटबंदी से अपने को दूर रखती आई है। लमही हिंदी की विराट प्रगतिशील परम्परा को समर्पित है। अंक के अतिथि संपादक सुशील सिद्धार्थ ने इस विशेषांक में शामिल सभी रचनाकारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी संपादक की सबसे बड़ी पूँजी रचनाकारों और पाठकों का भरोसा ही है । समारोह में यूकेएस चौहान, प्रभात रंजन, महेश भारद्वाज, गीता श्री, अजय नावरिया, विवेक मिश्र, शिवकेश मिश्र, संगम पांडे, विपिन चौधरी, कुमार अनुपम, मजकूर आलम, प्रान्जलधर, दीनबन्धु,अमिताभ राय एवं ज्योति कुमारी आदि उपस्थित थे।





