जिस सीएनईबी न्यूज चैनल के सैकड़ों मीडियाकर्मियों पर मजदूर दिवस के दिन छंटनी की लाठी पड़ी है, उसके बारे में खबर है कि वह चैनल अब न्यूज चैनल की बजाय इंटरटेनमेंट चैनल बनेगा. इसी कारण न्यूज से जुड़े सभी लोगों को बाहर किया जा रहा है. सीएनईबी प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों ने बातचीत में कहा कि कई वर्षों तक न्यूज चैनल चलाने के बाद जब दूर दूर तक इसके प्राफिट में आने की संभावना नहीं दिखी तो प्रबंधन ने न्यूज से हटकर जनरल इंटरटेनमेंट चैनल (जीईसी) बनने का इरादा किया. न्यूज चैनल के मुकाबले जीईसी में स्टाफ की जरूरत बेहद कम होती है.
न्यूज चैनल की प्रोग्रामिंग टीम को नहीं हटाया गया है, वे लोग आगे भी काम करते रहेंगे. उधर, मजदूर दिवस के दिन सैकड़ों मीडियाकर्मियों की छंटनी की खबर से पूरी मीडिया इंडस्ट्री सकते में है. पर दुर्भाग्य ये कि एयर इंडिया की छंटनी पर छाती पीट पीट कर हायतौबा मचाने वाले न्यूज चैनल और अखबार अपनी इंडस्ट्री में हुई इस बंपर छंटनी पर रहस्यमय चुप्पी साधे हुए हैं. यहां तक कि पत्रकार संगठन और मीडिया दिग्गज भी कुछ नहीं बोल रहे. वहीं, छंटनी के शिकार सीएनईबी के कुछ कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन खुद अपनी गलत नीतियों का शिकार हुआ है. अनुरंजन झा के समय में चैनल मुनाफे की तरफ जा रहा था, आज भी यह चैनल अगर अनुरंजन झा को सौंप दिया जाए तो वह मुनाफे में ला सकते हैं पर प्रबंधन के इगो और जिद के कारण बंटाधार हो गया.
चिटफंड के धंधे में लगे इस चैनल के मालिकों का वैसे भी न्यूज और सरोकार से कोई लेना देना नहीं था. वह इस चैनल के जरिए पावर गेम को मैनेज करने को इच्छुक थे. जब बात नहीं बनी तो हाथ खींच लिया और घाटे की बात कहकर छंटनी कर दी. इन कर्मियों का कहना है कि नौकरी से हटाए जाने पर प्रबंधन को कम से कम तीन महीने का वेतन देना चाहिए. अगर प्रबंधन ने तीन महीने का वेतन नहीं दिया तो सीएनईबी के गेट पर धरना दिया जाएगा.





